
नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। मलकपुर में करंट से साथी हाथी की मौत के बाद जंगल-जंगल भटक रहे हाथी भरत का आखिरकार 48 घंटे के लंबे ऑपरेशन के बाद रेस्क्यू कर लिया गया। यह रेस्क्यू किसी आम अभियान जैसा नहीं था, बल्कि हाथियों ने ही हाथी को बचाया।
वन विभाग ने भरत को पकड़ने के लिए अपनी सबसे भरोसेमंद टीम, चार पालतू हाथी रामा, सूर्या, चित्रा और बापू को मैदान में उतारा। दो दिन तक भरत जंगल में अकेला घूमता रहा, कभी खेतों के पास तो कभी पहाड़ियों में।
वन अमला ड्रोन और रेडियो कॉलर के जरिए उसकी लोकेशन ट्रैक करता रहा, लेकिन वह किसी के हाथ नहीं आ रहा था।
सोमवार देर रात वो पल आया जिसका सबको इंतजार था। रामा, सूर्या, चित्रा और बापू को जंगल के एक कोने में खड़ा किया गया। भरत ने दूर से अपने साथियों को देखा और फिर दौड़ पड़ा।
वह सीधे उनके पास पहुंचा और सूंड से सूंड मिलाकर लाड़ लड़ाने लगा, जैसे बिछड़े परिवार से मिल रहा हो।
हाथी सुरक्षित घेरे में लिया
भरत के इसी भावुक मिलन के पल का वन कर्मचारियों ने फायदा उठाया और सतर्कता के साथ उसे हल्का डॉट (ट्रैंकुलाइजर) लगाया। कुछ ही मिनटों में वह शांत हो गया। इसके बाद उसे कुमकी हाथियों की मदद से सुरक्षित घेरे में लिया गया।
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मौके पर डीएफओ लोकेंद्र निरापुरे सहित रीवा, मऊगंज और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारी, डॉक्टरों की टीम और बड़ी संख्या में वनकर्मी मौजूद रहे।
रातभर चली मशक्कत के बाद अल सुबह भरत को ट्रक में लोड कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए रवाना कर दिया गया, जहां उसे बाड़े में रखकर निगरानी में रखा जाएगा।
छत्तीसगढ़ से आए झुंड का हिस्सा है भरत
गौरतलब है कि, भरत और उसकी साथी मादा हाथी 2018 में छत्तीसगढ़ से आए झुंड का हिस्सा थे। दोनों बांधवगढ़ से निकलकर रीवा, मऊगंज होते हुए उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और प्रयागराज तक का 250 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुके थे।
करंट से हो गई थी मादा साथी की मौत
मलकपुर में खेत के पास लगे खुले बिजली तार की चपेट में आने से मादा हाथी की मौत हो गई थी। साथी की मौत के बाद भरत उसी इलाके में मंडरा रहा था और ग्रामीणों में दहशत थी।
वन विभाग के अनुसार अब भरत पूरी तरह सुरक्षित है। उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर लिया गया है और वह बांधवगढ़ में सुरक्षित हाथों में है।
इस सफल रेस्क्यू ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जंगल में हाथी ही हाथी का सबसे बड़ा सहारा है।