
नईदुनिया प्रतिनिधि, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद खौफनाक और विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है चितरंगी थाना इलाके में एक आठ साल की मासूम बच्ची असहनीय दर्द और दरिंदगी से जूझ रही है। आरोप किसी गैर पर नहीं, बल्कि उस पिता और सौतेली मां पर हैं, जिनकी गोद में बच्चे खुद को सबसे सुरक्षित महसूस करते हैं।
मासूम पिछले कई दिनों से अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में जिंदगी की जंग लड़ रही है बच्ची ने अपने पिता पर दुष्कर्म और सौतेली मां पर गर्म चिमटे से प्राइवेट पार्ट को दागने के बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। इस दिल दहला देने वाले मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी पिता का शव जंगल में फांसी के फंदे से लटकता मिला जबकि आरोपी सौतेली मां अब भी फरार है।
सिंगरौली के जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के बेड पर दर्द से कराहती यह मासूम खुद उठ पाने की स्थिति में भी नहीं है। बच्ची के साथ हुई हैवानियत का खुलासा तब हुआ जब 23 अगस्त को महिला पुलिस उसे बाल कल्याण समिति यानी सीडब्ल्यूसी के पास लेकर पहुंची। बच्ची ने समिति को अपनी आपबीती बताते हुए जो खुलासा किया उसने अधिकारियों के भी रोंगटे खड़े कर दिए।
मासूम बच्ची ने बताया कि पापा ने मेरे साथ गलत काम किया दर्द हुआ तो मैंने खाना नहीं बनाया इसके बाद मां ने मुझे पीटा और जब मैंने पेट के नीचे दर्द होने की बात कही तो उसने चिमटा गर्म करके मेरे प्राइवेट पार्ट पर लगा दिया।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष आर.डी. पांडेय के अनुसार बच्ची की हालत बेहद नाजुक है और उसे विशेष चिकित्सीय देखरेख में रखा गया है। शुरुआती इलाज के दौरान आरोपी पिता बच्ची को चुपके से अस्पताल से भगा ले गया था, लेकिन पुलिस और प्रशासन की तत्परता से उसे दोबारा बरामद कर वन स्टॉप सेंटर और फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वहीं इस मामले पर जिला अस्पताल की सिविल सर्जन डॉक्टर कल्पना रवि का कहना है कि बच्ची को आईसीयू में भर्ती कराया गया है और हमारे स्टाफ लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं। जब मेडिकल रिपोर्ट के संबंध में उनसे पूछा गया तो उनका कहना है कि पुलिस ने अगर मेडिकल कराया होगा तो उन्हें एक दिन बाद ही मेडिकल रिपोर्ट मिल जाती है।
वहीं दूसरी ओर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि हमें अभी तक मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। इससे अस्पताल की घोर लापरवाही सामने आ रही है, क्योंकि सिविल सर्जन को यह तक नहीं पता कि हमारे स्टाफ ने मेडिकल रिपोर्ट बनाई है या नहीं। बड़ा सवाल अगर बच्ची की हालत नाजुक है तो उन्होंने बच्ची को इतने दिनों तक अस्पताल में क्यों रखा बड़े अस्पताल में क्यों नहीं भेजा।
फिलहाल सिविल सर्जन ने कहा है कि हमारे मेडिकल कॉलेज की डॉक्टरों की टीम लगातार बच्ची पर निगरानी रखे हुए हैं और उसकी स्थिति अभी स्थिर बनी हुई है। इधर घटना के बाद से ही दोनों आरोपी फरार चल रहे थे। उस वक्त सनसनी फैल गई जब आरोपी पिता का शव जंगल में फांसी के फंदे पर लटका मिला। वहीं सौतेली मां अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
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इस पूरे मामले पर जब सिंगरौली एसपी से बात की गई तो उनका कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू की गहन जांच की जा रही है। एसपी के मुताबिक, बच्ची के दो अलग-अलग बयान सामने आए हैं। पहले बयान में उसने दुष्कर्म का जिक्र नहीं किया था और प्राथमिक मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर आंतरिक चोटों की पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि बच्ची के दूसरे बयान में पिता पर दुष्कर्म के सीधे आरोप लगाए गए हैं।
इसकी विस्तृत फोरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट आना अभी बाकी है पुलिस प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस वक्त पहली प्राथमिकता उस आठ साल की मासूम की जान बचाना और उसे बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराना है। बाल कल्याण समिति बच्ची की निगरानी कर रही है।
वहीं पुलिस फरार सौतेली मां की तलाश में दबिश दे रही है। वहीं इस पूरे मामले में जब सीधी सिंगरौली संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉक्टर राजेश मिश्रा से फोन पर बात की तो सांसद डॉक्टर राजेश मिश्रा ने बातचीत के दौरान बताया कि मामला उनके जानकारी में नहीं है। वह तुरंत ही एसपी एवं मुख्य चिकित्सक अधिकारी से बात करते हैं। अगर मासूम बच्ची की स्थिति नाजुक है तो उसे अन्य जिला में बेहतर उपचार के लिए तुरंत शिफ्ट करवाने का काम करेंगे।