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नईदुनिया प्रतिनिधि, चित्रकूट। दीपावली पर भगवान श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट में इस बार श्रद्धालुओं को भव्य ड्रोन शो देखने को मिलेगा। मंदाकिनी नदी के रामघाट पर दीपदान के बाद 500 ड्रोन के जरिए रामायण और रामचरितमानस के प्रसंग आसमान में साकार किए जाएंगे।
करीब 30 मिनट के इस शो में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ी आकृतियां दिखाई जाएंगी। इसके साथ ही बुंदेली लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मेले का आकर्षण बढ़ाएंगी। इनके लिए शहर में 9 मंच तैयार किए जा रहे हैं।
चित्रकूट में दीपावली के अवसर पर हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के साढ़े 11 वर्ष इसी क्षेत्र में बिताए थे। इसी आस्था के चलते दीपावली पर श्रद्धालु मंदाकिनी नदी के रामघाट में दीपदान करते हैं और कामदगिरि की परिक्रमा लगाते हैं।
इस बार प्रशासन धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक और आधुनिक तकनीक से जुड़े आकर्षणों को भी विशेष रूप से तैयार कर रहा है।
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दीपदान के बाद आसमान में दिखेंगे रामायण के प्रसंग
दीपावली मेले की नोडल अधिकारी एडीएम डॉक्टर कंचन गुप्ता ने बताया कि 500 ड्रोन से होने वाला शो मेले का प्रमुख आकर्षण रहेगा। ड्रोन एक साथ उड़ान भरकर आसमान में रामायण और रामचरितमानस से जुड़ी आकृतियां बनाएंगे। दीपदान के बाद आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जीवन के प्रमुख प्रसंगों की झलक देख सकेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रशासन का प्रयास है कि चित्रकूट आने वाले श्रद्धालु यहां से अच्छा अनुभव लेकर लौटें। बुंदेलखंड की लोककला, लोकगीत और सांस्कृतिक परंपराओं से पर्यटकों को परिचित कराने के लिए 9 मंचों पर कलाकार प्रस्तुतियां देंगे।
6 स्वागत द्वार और 17 पार्किंग स्थल होंगे तैयार
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए शहर में 6 स्वागत द्वार बनाए जा रहे हैं। बाहर से आने वाले वाहनों की व्यवस्थित पार्किंग के लिए 17 स्थल तैयार किए जा रहे हैं। रामघाट और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग को सजाया जा रहा है। प्रमुख स्थानों पर वॉल पेंटिंग के जरिए शहर को आकर्षक रूप दिया जा रहा है।
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के ठहरने वाले विश्रामालयों में भी सुविधाएं दुरुस्त की जा रही हैं। प्रशासन का लक्ष्य दीपावली मेले के दौरान धार्मिक आस्था, बुंदेली संस्कृति और आधुनिक तकनीक के समन्वय से चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना है।
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