
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना: सरकार भले ही दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की बात करती हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं। कोठी क्षेत्र के कठबरिया गांव में रहने वाला एक शारीरिक रूप से दिव्यांग कपल बीते चार वर्षों से मोटराइज्ड (बैट्री चालित) ट्राई साइकिल के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा है।
कठबरिया निवासी कामता प्रसाद वर्मा और उनकी पत्नी ममता वर्मा दोनों ही शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं। कपल का कहना है कि इलाज, रोजगार और रोजमर्रा की आवश्यकताओं के लिए मोटराइज्ड ट्राई साइकिल उनके जीवन की बुनियादी जरूरत है। हाथ से चलने वाली ट्राई साइकिल न तो लंबी दूरी तय करने में सक्षम है और न ही दोनों पति-पत्नी के लिए उपयोगी साबित होती है।
दिव्यांग कपल ने बताया कि वे अब तक तीन बार जिला कलेक्टर सतना की जनसुनवाई में लिखित आवेदन दे चुके हैं। हर बार उन्हें मामले की जांच कर शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया गया, लेकिन कुछ समय बाद फाइल फिर ठंडे बस्ते में चली जाती है। कभी समाज कल्याण विभाग तो कभी पंचायत स्तर पर मामला टाल दिया जाता है।
कामता प्रसाद वर्मा का कहना है कि एक बार उन्हें हाथ से चलने वाली ट्राई साइकिल दे दी गई, जबकि उन्होंने स्पष्ट रूप से मोटराइज्ड ट्राई साइकिल की मांग की थी। दोनों पति-पत्नी के दिव्यांग होने के कारण यह वाहन उनके किसी काम का नहीं है, जिससे वे कई बार घर से बाहर निकलने में भी असमर्थ हो जाते हैं।
यह मामला सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि वास्तविक जरूरतमंदों को समय पर लाभ नहीं मिलेगा, तो योजनाओं का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। चार वर्षों तक एक बुनियादी सुविधा के लिए भटकना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है।
दिव्यांग कपल ने जिला प्रशासन से एक बार फिर अपील की है कि उनकी स्थिति को समझते हुए उन्हें तत्काल मोटराइज्ड ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
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