
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। जिले के नागौद विकासखण्ड अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव के किसान के 26 वर्षीय बेटे कृष्णा पयासी ने आगामी इनडोर एशियन गेम्स 2026 में अपना स्थान पक्का कर लिया है। कृष्णा मिक्स्ड मार्शल आर्ट (MMA) के 85 किलोग्राम वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
उन्होंने शनिवार को चाइना के जुझायू शहर में प्रवेश के लिए आयोजित टेस्ट फाइट में पिछले साल के चाइनिज गोल्ड मेडिलिस्ट को पहले ही राउंड में नॉक आउट कर दिया। ऐसा करते ही उन्होंने टॉप-4 की लिस्ट में अपनी जगह बना ली और एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करना पक्का कर लिया।
कृष्णा पयासी के पिता उमाकांत पयासी एक छोटे किसान है, जबकि उनकी माता रामभाई पयासी गृहणी है। इसके अलावा उनके दो भाई हैं। जिनमें से एक भाई पंडित हैं और दूसरा माकेटिंग की नौकरी करता है। भले ही आज कृष्णा को उनके जिला व राज्य में कोई नहीं जानता हो, लेकिन सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते हुए आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल कर पूरे देश का गर्वान्वित किया है। उल्लेखनीय है कि एशियन गेम्स 2026 जापान और सऊदी अरब में होने वाले है। फिलहाल आयोजन का स्थान निर्धारित नहीं हो सका है।
कृष्णा पयासी का यह सफर इंतना भी आसान नहीं रहा। कृष्णा को बचपन से ही फाइटिंग का बहुत रूचि थी।परिवार में आर्थिक तंगी होने के कारण उन्होंने अपनी दसवीं व बारहवीं की पढ़ाई ओपर स्कूल के जरिए पूरी की।हायरसेकेण्डरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद कृष्णा ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी।
कृष्णा ने तया किया कि अब वह एमएमए फाइटर ही बनेगें। सबसे पहले कृष्णा ने वर्ष 2015 में सतना के शैलेन्द्र शर्मा से वुशू सिखाना शुरु किया। जिसके दो साल बाद कृष्णा मुबंई के एक एमएमए टे्रनिंग सेंटर पहुंचे। जहां उन्होनें अपनी आगे की तैयारी पूरी की। कृष्णा बताते है कि बीते करीब 14 वर्षो से वह लगातार तैयारी कर रहे हैं। इस बार उन्हें देश के लिए खेलने का मौका मिलेगा।
यह भी पढ़ें- गर्लफ्रैंड ने मिलने के लिए बुलाया, तभी उसके पिता ने रंगे हाथों पकड़ लिया; विवाद के दौरान ऑडिटोरियम की छत से गिरा युवक
कृष्णा बताते है कि पहली ही फाइट में चाइना के गोल्ड मेडलिस्ट फाइटर को फास्ट राउंड में नाक आउट करने के बाद दूसरी लड़ाई के दौरान डिसीजन लॉस हो गया। दरअसल दूसरी फाइट में कृष्णा के आंख के नीचे गहरा कट आ जाने से करीब दस टांके लगाए गए। जिसकी वजह से उन्हें स्वयं रुकने का निर्णय लेना पड़ा। हालंकि पहली ही फाइट में कृष्णा ने टॉप-4 में पक्का कर लिया था। एशियन गेम्स में क्वॉलिफाई के लिए टाप-16 में रैंक आना आवश्यक होता है।