सतना में अवैध प्लॉटिंग की जांच पूरी हुए बिना ही SDM ने खसरे से हटाई 'लंबित' की टीप, आदेश पर सवाल
सतना के मझगवां भट्टा में अवैध प्लॉटिंग मामले में एसडीएम ने बिना तकनीकी सत्यापन के खसरे से 'लंबित जांच' की टीप हटा दी। इस आदेश और पटवारी रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं।
Publish Date: Sun, 01 Nov 2026 08:47:11 AM (IST)Updated Date: Sun, 01 Nov 2026 08:47:11 AM (IST)
सतना में SDM के आदेश पर सवाल। (एआई जनरेटेड)HighLights
- मझगवां भट्टा में अवैध प्लॉटिंग का मामला।
- एसडीएम ने खसरे से हटाई जांच लंबित होने की टीप।
- शिकायतकर्ता ने सौंपे थे प्लॉटिंग के फोटो सबूत।
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। जिले के मझगवां भट्टा की जिस जमीन पर अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनी विकसित करने की शिकायतें हुईं, उसी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड से जांच लंबित होने की टिप्पणी हटा दी गई। एसडीएम रघुराजनगर (शहरी) राहुल सिलाड़िया के 28 अक्टूबर 2026 के आदेश ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो आवेदकों की शिकायत पर जांच शुरू हुई, खसरे के कॉलम नंबर 12 में जांच लंबित होने की टीप दर्ज कराई गई, लेकिन बाद में सहखातेदार के शपथ-पत्र और पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर इसे हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए।
मामला मौजा मझगवां भट्टा की आराजी क्रमांक 125, 126, 127 और 128/2 की करीब 1.323 हेक्टेयर जमीन का है। बगहा निवासी रामसिंह गोंड ने चारों आराजियों में अवैध कॉलोनी विकसित करने की शिकायत की थी। वहीं माधुरी ओझा ने आराजी क्रमांक 125, 126 और 127 पर कथित अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी। दोनों शिकायतों पर अलग-अलग राजस्व प्रकरण दर्ज कर बाद में संयुक्त कर दिए गए।
शपथ-पत्र पर भरोसा, तस्वीरों के दावों की जांच पर सवाल
- आदेश के अनुसार, सहखातेदार शिवा सिंह ने शपथ-पत्र देकर जमीन पर कृषि कार्य होने तथा प्लॉटिंग, सड़क और नाली निर्माण नहीं कराने की बात कही। भविष्य में आवासीय या व्यावसायिक उपयोग के लिए वैधानिक अनुमति लेने का आश्वासन भी दिया गया। इसके बाद हल्का पटवारी राजेश प्रजापति के प्रतिवेदन में मौके पर अवैध प्लॉटिंग अथवा अनधिकृत निर्माण नहीं मिलने का उल्लेख किया गया। इसी आधार पर एसडीएम ने जांच की टीप हटाकर तीन कार्य दिवस में अद्यतन खसरा नकल प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
- हालांकि, शिकायतकर्ता माधुरी ओझा ने शिकायत के साथ प्लॉटिंग की तस्वीरें भी प्रस्तुत की थीं। उनका दावा है कि मौके पर भूखंड काटे गए हैं और सड़क बनाई गई है। शिकायत में टीएनसीपी की अनुमति और रेरा पंजीयन नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया था। ऐसे में सवाल है कि तस्वीरों और मौके की स्थिति का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन कराए बिना शपथ-पत्र तथा पटवारी रिपोर्ट को पर्याप्त कैसे मान लिया गया?
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पुराने दस्तावेज और अधिकार क्षेत्र भी सवालों में
- जमीन की 3 जुलाई की रजिस्ट्री क्रमांक 03072601155026 में आकांक्षा सिंह के नाम बिक्री तथा 10 जुलाई को रास्ते और बाउंड्री विवाद में न्यायालयीन रोक का मुद्दा भी सामने आया था। इन दस्तावेजों का संयुक्त प्रकरण में किस स्तर पर परीक्षण हुआ, यह स्पष्ट होना जरूरी है।
- अधिकार क्षेत्र को लेकर भी विरोधाभास है। आदेश में जमीन को ग्राम पंचायत की सीमा में बताया गया, जबकि संबंधित पत्र में इसे नगर निगम सतना की सीमा में बताते हुए अवैध कॉलोनी प्रकोष्ठ से जांच कराने की बात कही गई।
- एसडीएम ने तहसीलदार को 15 दिन में तकनीकी और विधिक निरीक्षण कर प्रतिवेदन देने तथा पटवारी को अवैध प्लॉटिंग की सूचना तत्काल देने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में सवाल है कि जब निरीक्षण और निगरानी जरूरी है, तो शिकायतों का समग्र निराकरण किए बिना राजस्व रिकॉर्ड से जांच की टीप हटाने की जल्दबाजी क्यों की गई?
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