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VIT सीहोर में स्‍टूडेंट्स को जो पानी पिला रहे थे, उसमें मिला बीमार करने वाला बैक्‍टीरिया

पीएचई विभाग द्वारा लिए गए पानी के 18 नमूनों में से चार में बैक्टीरिया की उपस्थिति मिली है। इसके अलावा कोलोनी फार्मिग यूनिट (सीएफयू) की गंभीर कमी भी पा...और पढ़ें

By Navodit SaktawatEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Sat, 29 Nov 2025 11:37:38 PM (IST)Updated Date: Sun, 30 Nov 2025 12:11:48 AM (IST)
VIT सीहोर में स्‍टूडेंट्स को जो पानी पिला रहे थे, उसमें मिला बीमार करने वाला बैक्‍टीरिया
वीआईटी सीहोर।

HighLights

  1. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की जांच में हुआ खुलासा
  2. विद्यार्थियों की इसी शिकायत को झूठा बता रहा था प्रबंधन।
  3. बवाल और आगजनी के बाद लिए गए थे पानी के नमूने।

नईदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। कोठरी स्थित वेल्लोर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (वीआईटी) विद्यार्थियों को जो पानी पिला रहा था, उसमें बीमार करने वाले बैक्टीरिया थे। इसका खुलासा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) की जांच में हुआ है। पीएचई ने 25 नवंबर को हुए हंगामे और आगजनी के बाद विद्यार्थियों के आरोपों की जांच के लिए पानी के ये नमूने लिए थे।

पीएचई विभाग द्वारा लिए गए पानी के 18 नमूनों में से चार में बैक्टीरिया की उपस्थिति मिली है। इसके अलावा कोलोनी फार्मिग यूनिट (सीएफयू) की गंभीर कमी भी पाई गई है। सीएफयू की कमी का अर्थ है कि पानी में बैक्टीरिया नियंत्रण से बाहर हैं और पानी पीने योग्य नहीं है।


समिति ने बताया कि ऐसी स्थिति में हैजा, टाइफाइड, पीलिया, गंभीर डिहाइड्रेशन, खून में आक्सीजन की कमी (मेथेमोग्लोबिनेमिया) और रासायनिक प्रदूषण से कैंसर तक का खतरा बढ़ सकता है।

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25 नवंबर की रात विश्वविद्यालय परिसर में पानी और भोजन की खराब गुणवत्ता को लेकर हालात बिगड़ गए थे। करीब चार हजार छात्रों ने हंगामा शुरू किया और देखते ही देखते बसें, कारें और एम्बुलेंस आग की चपेट में आ गईं। छात्रों ने आरोप लगाया था कि 100 से अधिक विद्यार्थी पीलिया से पीड़ित होकर अस्पतालों में भर्ती हैं, लेकिन प्रबंधन लापरवाही बरत रहा है।

शनिवार को आई रिपोर्ट में साफ हो गया है कि विद्यार्थियों की शिकायत सही थी। प्रबंधन इस मामले में अनदेखी कर रहा था। प्रशासनिक पूछताछ में प्रबंधन ने बताया कि एक से 24 नवंबर के बीच 23 छात्रों और 12 छात्राओं को पीलिया की शिकायतें आई थीं। समिति ने जब उनकी जांच और इलाज का रिकार्ड मांगा तो प्रबंधन कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सका।

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चिकित्सा केंद्र भी सवालों के घेरे में

  • जांच समिति ने विश्वविद्यालय के भीतर संचालित चिकित्सा केन्द्र को भी कठघरे में खड़ा किया है। यहां किसी बीमार का कोई भी रिकार्ड नहीं मिला।
  • समिति ने पाया कि प्रबंधन रिकार्ड छिपाने या लीपापोती कर रहा है। चिकित्सा केन्द्र की सूचना सरकार को नहीं दी गई, जो नियमों का उल्लंघन है। बीमारी रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए।

पानी के 18 नमूने लिए थे, जिनमें से चार फेल हुए हैं। कॉलोनी फार्मिंग यूनिट की मात्रा केवल 10 प्रतिशत रही। इससे उल्टी-दस्त व हैजा जैसे रोग फैल सकते हैं।

प्रदीप सक्सेना, ईई पीएचई