बीमार होने के साथ भोजन या पानी मिला है या नहीं इसका भी पता चल सकेगा

भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून की टीम लगाएगी रेडियो रेडियो कॉलर

मनोज श्रीवास्तव, श्योपुर। मध्य प्रदेश स्थित कूनो-पालपुर नेशनल में अब पार्क प्रबंधन पर्यटकों को तेंदुआ (लेपर्ड) और हायना (लकड़बग्घा) दिखाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विशेषज्ञों का दल तेंदुआ और हायना को कालर आइडी लगाएगा। इसका लाभ इन जानवरों की लोकेशन पता करके इन्हें पर्यटकों को दिखाया जा सकेगा। साथ ही जब ये वन्य जीव ग्रामीण आबादी वाले इलाकों के आसपास पहुंचेंगे तो ग्रामीणों को इनसे बचने के लिए सचेत भी किया जा सकेगा, साथ ही इन वन्य जीवों को आबादी से दूर भी किया जा सकेगा।

यहां बता दें, कि कूनो में अफ्रीकी चीता लाने की तैयारियां चल रही हैं। इसी के चलते कूनो मेंं सुरक्षा के लिहाज से कदम उठाए जा रहे हैं। कूनो में 75 तेंदुआ और करीब 80 हायना हैं। पहले चरण में 10 तेंदुओं और 10 हायना मेें रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे। इसकी अनुमति डब्ल्यूआइआइ (वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया) भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून से भी मिल चुकी है। रेडियो कालर लगाने के लिए देहरादून से एक्टपर्ट की टीम जनवरी में कूनो आएगी।

अधिकारियों की मानें तो लेपर्ड और हायना में वन विभाग के अफसर, वन्यजीव चिकित्सक सहित अन्य एक्सपर्ट कूनो में जाएंगे। पहले लेपर्ड को बेहोश किया जाएगा। इसके बाद एक्सपर्ट रेडियो कालर पहनाएगी। इसके बाद उसे एंटी डोज का इंजेक्शन दिया जाएगा, ताकि लेपर्ड होश में आ सके। विशेषज्ञों के मुताबिक लेपर्ड, हायना में लगाई जा रही कालर में मौजूद बैटरी की क्षमता करीब 5 से 7 वर्ष तक रहती है। जरूरत न होने पर इसे ऑटोमैटिक ब्रेकडाउन किया जा सकता है।

ऐसे काम करेगा रेडियो कालर आइडी

लेपर्ड और हायना में लगाया जाने वाला कालर आइडी अफ्रीका से मंगवाए जाते हैं। डब्ल्यूआइआइ इसकी खरीदी करता है। गले में फिट करने के बाद जीपीएस और इंटरनेट के जरिए जानवरों का मूवमेंट को देखा जा सकता है। इसमें लगी बैटरी पानी में भीगने और धूप में भी लगातार काम करती है। लड़ाई और वृक्षों में फंसने एवं अन्य वजह से टूटकर गिरने पर ही मूवमेंट की जानकारी नहीं मिल पाती है।

कूनो डीएफओ के मुताबिक रेडियो कालर आइडी लगाने के बाद तेंदुआ और लेपर्ड का व्यवहार देखा जाएगा। इसमें तेंदुआ का चीतों से व्यवहार कैसा है। क्योंक चीतों को सर्वाधिक खतरा तेंदुआ से ही है। तेंदुआ यदि दिन में मूवमेंट नहीं करेगा तो संबंधित लोकेशन को चेक कर पता लगाया जा सकेगा कि कहीं वह बीमार तो नहीं है या वह किसी मुसीबत में तो नहीं हैं।

इनका कहना है

कूनो में चीते आने से पहले तेंदुआ और हायना में रेडियो कालर आइडी लगाई जाएगी। इस डिवाइस से तेंदुआ के बारे में पल-पल की जानकारी मिलेगी और खतरे से पहले ही अलर्ट होकर जान-माल के नुकसान से बचा जा सकेगा। पर्यटकों को भी इससे लाभ मिलेगा।

पीके वर्मा, डीएफओ कूनो-पालपुर नेशनल पार्क

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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