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नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। धान की कटाई के सीजन में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है।
पराली प्रबंधन के प्रयासों में लापरवाही मिलने पर कलेक्टर शीला दाहिमा ने 15 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों (आरएईओ) को नोटिस जारी करवाकर, उनका 15-15 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही स्पष्ट किया कि खेतों में पराली जलाने और बिना एसएमएस कटर के हार्वेस्टर चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। रविवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता भी प्रभावित होती है।
धान का रकबा बढ़ने के कारण इसके वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कृषि विभाग के मैदानी अमले को लगातार गांवों का भ्रमण करने और ग्राम स्तरीय निगरानी समितियों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए।
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हार्वेस्टरों और कंबाइन मशीनों में एसएमएस लगाना अनिवार्य
कलेक्टर ने पुलिस और परिवहन विभाग को नाकों पर बाहर से आने वाले हार्वेस्टरों की जांच करने तथा उनमें एसएमएस कटर की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। जिले में पंजीकृत सभी हार्वेस्टरों और कंबाइन मशीनों में भी एसएमएस लगाना अनिवार्य होगा।
तहसीलदारों को कोटवारों के माध्यम से इसकी निगरानी कराने के निर्देश दिए गए हैं। पशुपालकों को भी पराली से पशुचारा तैयार करने की मुहिम से जोड़ने पर जोर दिया गया।
15 हजार तक लगेगा जुर्माना
पराली जलाने पर दो एकड़ से कम भूमि के लिए 2500, दो से पांच एकड़ तक पांच हजार तथा पांच एकड़ से अधिक रकबे पर 15 हजार रुपये अर्थदंड का प्रावधान है। बैठक में जिला पंचायत सीईओ कार्तिकेय जायसवाल, अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय सहित कृषि एवं अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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