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महाअष्टमी पर उज्जैन की सुख-समृद्धि के लिए नगर पूजा, कलेक्टर ने माता को लगाया मदिरा का भोग

सोमवार सुबह उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने चौबीस खंभा स्थित महामाया और महालया माता मंदिर में पूजा-अर्चना और मदिरा अर्पित कर नगर पूजा का शुभारंभ किय...और पढ़ें

By Suryanarayan MishraEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 09:21:26 AM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 10:00:46 AM (IST)
महाअष्टमी पर उज्जैन की सुख-समृद्धि के लिए नगर पूजा, कलेक्टर ने माता को लगाया मदिरा का भोग
महामाया और महालया माता मंदिर में कलेक्टर ने अर्पित की मदिरा।

HighLights

  1. सम्राट विक्रमादित्य ने इस परंपरा की शुरुआत की थी
  2. कालांतर में सिंधिया रियासत ने भी इसे आगे बढ़ाया
  3. आजादी के बाद से शासन की ओर से पूजा की परंपरा

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। धर्मधानी उज्जैन में सोमवार को नगर की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना से पारंपरिक नगर पूजा हो रही है। करीब 2100 वर्ष प्राचीन इस परंपरा के अंतर्गत 27 किलोमीटर लंबे नगर पूजा मार्ग पर मदिरा की धार लगाई जा रही है। देवी और भैरव मंदिरों में पूजा-अर्चना कर नगर की रक्षा और मंगल की कामना की जा रही है।

मान्यता है कि सम्राट विक्रमादित्य ने नगर की सुख-समृद्धि और रक्षा के लिए इस परंपरा की शुरुआत की थी। कालांतर में सिंधिया रियासत ने इसे आगे बढ़ाया। आजादी के बाद से शासन की ओर से नगर पूजा की परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।


सोमवार सुबह उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने चौबीस खंभा स्थित महामाया और महालया माता मंदिर में पूजा-अर्चना और मदिरा अर्पित कर नगर पूजा का शुभारंभ किया। इसके बाद शासकीय दल नगर के विभिन्न देवी और भैरव मंदिरों में पूजन सामग्री अर्पित किया जा रहा है।

मंदिरों में नारियल, तेल, सिंदूर, ध्वजा और अन्य पूजा सामग्री चढ़ाई जा रही है। नगर पूजा के दौरान मार्ग में मदिरा की धार लगाई जा रही है। यह अनूठी परंपरा उज्जैन की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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हरसिद्धि में पूजा

शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में दोपहर 12 बजे शासकीय पूजा होगी। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह सपत्निक माता हरसिद्धि की पूजा अर्चना करेंगे। देवी को सौभाग्य सामग्री अर्पित की जाएगी।

नगर पूजा की खास बातें

  • 12 घंटे नगर पूजा
  • 20 से अधिक शासकीय कर्मचारी शामिल हो रहे
  • 27 किलोमीटर लंबे मार्ग पर मदिरा की धार
  • 25 लीटर से अधिक मदिरा का उपयोग
  • 40 से अधिक देवी व भैरव मंदिरों में पूजा

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