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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 07, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Ujjain: 28 दिन में उखड़ी सड़क, ठेकेदार पर 10 लाख की पेनल्टी... तीन इंजीनियरों पर भी जांच की आंच

MP News: नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने दोषी ठेकेदार अमित जिंदल का भुगतान रोकते हुए 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही, कार्यपालन यंत्री...और पढ़ें

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 07 Sep 2025 10:41:36 PM (IST)Updated Date: Sun, 07 Sep 2025 10:41:36 PM (IST)
Ujjain: 28 दिन में उखड़ी सड़क, ठेकेदार पर 10 लाख की पेनल्टी... तीन इंजीनियरों पर भी जांच की आंच
28 दिन में उखड़ी सड़क, ठेकेदार पर 10 लाख की पेनल्टी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. उज्जैन में 28 लाख रुपये से बनी सड़क महज 28 दिन में उखड़ी
  2. जांच रिपोर्ट में खुलासा, नाली का प्रावधान न रखने से टूट गई सड़क
  3. नगर निगम की तकनीकी और निगरानी व्यवस्था पर भी अंगुली उठी

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। मुख्यमंत्री के गृह शहर उज्जैन के वार्ड क्रमांक चार स्थित कानीपुरा मार्ग पर 28 लाख रुपये से बनी सड़क महज 28 दिन में उखड़ गई। जांच में खुलासा हुआ कि सड़क निर्माण के दौरान नाली का प्रावधान ही नहीं रखा गया था, जिससे पानी भरने पर सड़क टूट गई। इस गंभीर लापरवाही ने न केवल करोड़ों की योजना की साख पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि नगर निगम की तकनीकी और निगरानी व्यवस्था पर भी अंगुली उठाई है।

ठेकेदार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना

नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने दोषी ठेकेदार अमित जिंदल का भुगतान रोकते हुए 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही, कार्यपालन यंत्री साहिल मेदावाल, सहायक यंत्री राजकुमार राठौर और उपयंत्री संजय खुजनेरी पर विभागीय जांच बैठाई है। आयुक्त का साफ कहना है कि ‘जब ठेकेदार को पता था कि नाली के बिना सड़क टिक नहीं पाएगी, तो उसे काम ही नहीं लेना चाहिए था। ये जिम्मेदारी से बचने का सीधा प्रयास है।’


मामला जून माह में किए गए डामरीकरण से जुड़ा है। महज एक महीने में ही सड़क जगह-जगह से उखड़ गई और गड्ढों में बदल गई। निगम की जांच समिति की रिपोर्ट में सतह की तैयारी, प्राइम कोटिंग, रोलिंग और सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए गए। ठेकेदार अमित जिंदल ने निगम आयुक्त को लिखित माफी देकर वर्षा समाप्त होने के बाद नाली सहित सड़क दोबारा बनाने की अनुमति मांगी है। हालांकि आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि इस बार जवाबदेही तय किए बिना काम आगे नहीं बढ़ेगा।

पहले भी उठे सवाल... और भी हैं कई मामले

नईदुनिया ने इस मामले को पिछले माह प्रमुखता से प्रकाशित किया था। नागरिकों ने भी आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान मानकों की अनदेखी की गई। सीसी रोड पर डामरीकरण तकनीकी दृष्टि से विशेष सतर्कता मांगता है, लेकिन यहां मूलभूत व्यवस्था की अनदेखी हुई। यह भी स्पष्ट है कि मामला केवल कानीपुरा मार्ग का नहीं है, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों में बनी सड़कों का है जो गारंटी अवधि पूरी होने से पहले ही छलनी-छलनी हो गई है।

महापौर मुकेश टटवाल ने इस संबंध में आयुक्त को कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। अब जवाबदेही की असली परीक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रकरण नगर निगम प्रशासन के लिए जवाबदेही तय करने की असली परीक्षा है। यदि दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई होती है, तो यह भविष्य में मानकों से समझौता रोकने की मिसाल बनेगा।

यह भी पढ़ें- MP के 25 लाख निरक्षर लोगों को साक्षर बनाएंगे ‘अक्षर साथी’, इस उम्र के व्यक्तियों पर किया जाएगा फोकस

क्या हैं नियम और जिम्मेदारी?

नियम : डामरीकरण कार्य में भारतीय सड़क कांग्रेस मानकों का पालन अनिवार्य। सतह की सफाई, प्राइम कोट और उचित रोलिंग जरूरी।

जिम्मेदारी : ठेकेदार, कार्यपालन यंत्री और निगरानी दल गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी।

व्यवस्था: निर्माण पूर्व तकनीकी स्वीकृति, निर्माण के दौरान थर्ड-पार्टी निरीक्षण और कार्य पूर्ण होने पर दोष अवधि में निगरानी। मानक उल्लंघन पर जुर्माना, ब्लैक लिस्टिंग और अनुबंध निरस्त करने की कार्रवाई।

तकनीकी खामी : सीसी रोड पर डामरीकरण से पहले सतह की सफाई व प्राइम कोटिंग का अभाव, अनुचित रोलिंग, डामर परत की कम मोटाई, और सामग्री की गुणवत्ता पर शंका।