Gaslighting:जब कोई अपने पार्टनर को पूरी तरह से और बुरी तरह से नियंत्रित करना चाहता है। उसकी हर बात नकारना चाहता है, जिससे उसका व्यक्तित्व विरोधाभासों से भर जाए, तब ये गैसलाइटिंग कहलाती है। हाल फिलहाल रिश्तों से संबंधित काउंसलिंग में ये बहुत अलग लेवल पर निकल कर आया है। हालांकि ये कोई नया नहीं, लेकिन अब लोग इसे समझने लगे हैं। इसका कारण सबसे बड़ा है पार्टनर को पूरा बदल देने की चाहत। इस तरह से ब्रेनवॉश करना कि आपके सोचने और विचार करने के पूरे के पूरे सिस्टम से खिलवाड़। ऐसा वो लोग भी करते हैं जो एक समूह को, भीड़ को अपने तरीके से चलाना चाहते हैं और इसमें बहुत हद तक कामयाब हो जाते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति ऐसी परिस्थितियों से घिरा रहता है कि ना चाहते हुए भी नियंत्रित होता रहता है और स्वयं के प्रति उदासीन होता जाता है। इस तरह के अपमानजनक रिश्ते और व्यवहार से निकलने के लिए सबसे पहले आपको पता होना जरूरी है कि आप किसी से नियंत्रित हो चुके हैं।

‌गैसलाइटिंग शब्द 1938 में पैट्रिक हैमिल्टन के प्ले "गैस लाइट" तथा 1940 और 1944 में रिलीज़ हुई फिल्म के रूपांतरण से आया। जिसमें एक शातिर पति धीरे-धीरे अपनी पत्नी को मानसिक रूप से लाचार कर देता है। उसका वैचारिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लेता है। जो उसकी पत्नी की हर इच्छा को कम कर देता है। वो अपने घर की गैस लाइट को धीमा करता जाता है और अपनी पत्नी के लिए एक अंधेरे का भ्रम पैदा करता है जिससे जब उसकी पत्नी शिकायत करती है, तो वह उसे आश्वस्त करता है कि नहीं, लाइट तो ठीक ही है। तुम्हारे दिमाग में कोई समस्या है। इस तरह से वो उसे मनोवैज्ञानिक शोषण के ज़रिए मानसिक रूप से विक्षिप्त बना देता है। (इस खास पैरा का सन्दर्भ और जानकारी फ़र्थ शैनन, "गैस लाइटिंग क्या है?" द वीक ऑनलाइन से लिया गया है।)

ये एक व्यवहार का एक बेहद बारीक मनोवैज्ञानिक मिसयूज़ है जिसके ज़रिए सामने वाला आपके दिमागी संतुलन के साथ तगड़ी हेर-फेर करता है। एक गाली गलौज से भरा व्यवहार जिसे भावुकता की चाशनी में लपेटकर, निभाया जाता है ताकि पीड़ित को लगता रहे कि सामने वाला तो उसकी परवाह के तहत ऐसा कर रहा है। इस तारक के व्यवहार में एक रिश्ते में बंधे लोग अपने साथी के साथ इमोशनल अब्यूज़िव बिहेवियर के ज़रिए उसे वास्तविकता से बहुत दूर कर देते हैं। यानी कि किसी के दिमाग में सेंध लगाकर उसके साथ इस तरह से छेड़खानी करना कि सामने वाला हर बात आपके अनुसार सोचे। उसे विचारों में इतना लचर बना देना कि उसे हर बात पर भ्रम होने लगे। उसकी याददाश्त को क्रूर तरीके से चुनौती देना। हर बात में शक और संदेह पैदा कर देना। उसे वैचारिक रूप से लाचार बना देना।

ये होता है खासकर रिश्तों में

जब कोई अपने पार्टनर को पूरी तरह से और बुरी तरह से नियंत्रित करना चाहता है। उसकी हर बात नकारना चाहता है, जिससे उसका व्यक्तित्व विरोधाभासों से भर जाए, तब ये कहलाती है गैसलाइटिंग।

हाल फिलहाल रिश्तों से संबंधित काउंसलिंग में ये बहुत अलग लेवल पर निकल कर आया है। हालाँकि ये कोई नया नहीं किन्तु लोग अब इसे समझने लगे हैं। पहचानने लगे हैं।

इसका कारण सबसे बड़ा है पार्टनर को पूरा बदल देने की चाहत। सब कुछ सामने वाले के अनुसार। सब कुछ। पूरी और बुरी तरह से नियंत्रित।

इस तरह से ब्रेनवॉश करना कि आपके सोचने और विचार करने के पूरे के पूरे सिस्टम से खिलवाड़।

ऐसा वो लोग भी करते हैं जो एक समूह को, भीड़ को अपने तरीके से चलाना चाहते हैं और इसमें बहुत हद तक कामयाब हो जाते हैं।

इससे पीड़ित व्यक्ति ऐसी परिस्थितियों से घिरा रहता है कि ना चाहते हुए भी नियंत्रित होता रहता है और स्वयं के प्रति उदासीन होता जाता है।

देखिए इस तरह के अपमानजनक रिश्ते और व्यवहार से निकलने के लिए सबसे पहले आपको पता होना ज़रूरी है कि आप किसी से नियंत्रित हो चुके हैं।

अपने गैसलाइटर को आप इस तरह पहचानने की कोशिश कीजिए।

1. क्या आप बार बार लगातार अपने साथी से माफी मांगते हैं। इससे आपके पार्टनर के इगो को संतुष्टि मिलती है।

2. आप वजह बेवजह हर एक बात पर संवेदनाओं का तीक्ष्ण अनुभव करते हैं। इस बात का फायदा सामने वाला ताने के रूप में करता है और आपको हद से ज़्यादा संवेदनशील होने के तंज कसे जाते हैं।

3. आपको हर कार्य में किसी की राय और अनुमोदन की आवश्यकता महसूस होती है बावजूद इसके कि आप जानते हैं कि आपका कार्य एकदम सही है।

4. एक वैचारिक शिथिलता हर वक्त आपके अंदर मौजूद है।

5. सेल्फ रेस्पेक्ट नाम की कोई चीज आपके अंदर नहीं बची है। हर बात पर सहमति दे देना आपको अच्छा और आसान लगता है ताकि आपको खारिज होने का डर ना सताए।

6. आपने सामने वाले के लिए किसी भी तरह की सीमाएं निर्धारित नहीं कर रखी हैं।

7. आपने आखिरी बार खुद से सवाल‌ कब किए थे या सामने वाले से।

8. सब कुछ अच्छा होने पर भी उसे एंजॉय न कर पाना? खुशियों पर उदासीन रहना।

9. आपका पार्टनर बार बार आपकी मेंटल हेल्थ पर सवाल‌ खड़ा करता हो। गाहे बगाहे आपको पागल करार देता हो।

11. हर बात में स्पष्ट सबूत होने पर भी खुद पर ही शक करते रहना जबकि बात एकदम साफ़ तौर पर साबित करने लायक हो।

12. हर गंभीर बात को मजाक कहकर आपके मजाक सहने की क्षमता पर तंज कसना।

13. सामने वाले का लगातार बोलते रहना, "तुम पागल हो रही/रहे हो।

14. आपको चिढ़ाते रहना अनवरत, "तुम तो बात बात में ड्रामा करते/करती हो।

महत्वपूर्ण ये है कि उपर्युक्त लिखी बातों की फ्रीक्वेंसी (बारंबारता) क्या है (कितनी बार होता है) ये जानना भी महत्वपूर्ण है। किसी ने एक दो‌ तीन बार कह दिया या पूछ लिया तो वो शोषण नहीं है। कुछ बातें मूड स्विंग में भी आती हैं। इस बात को समझें। नाहक स्वयं को‌ शिकार ना मान लें। इन बातों की तीव्रता क्या है? ये कितने अन्तराल में आपके साथ घट रही है? इस पर ध्यान देना अहम है।

यदि यही बातें लगातार, रोज़ हर रोज़ हो रही हैं तो वो गैसलाइटिंग के अलावा कुछ नहीं है। आप इसके शिकार हैं। इन सवालों के जवाबों से आपको पता चलेगा कि किसी रिश्ते में आप गैसलाइटिंग के किस हद तक शिकार हो चुके हैं। अवसाद इसका परिणाम है। रिश्तों में जब आप निखरने की बजाए बिखरने लगे तब रूकिए, रूक जाइए। अपने गैसलाइटर की पहचान कीजिए और इस मनोवैज्ञानिक शोषण और अत्याचार से मुक्ति पाने की और बढ़िए।

इस तरह का रिश्ता सिर्फ दो‌ लोगों के बीच ही नहीं होता बल्कि आपके आसपास की ज़द में आए हर रिश्ते पर ये होता है। सोशल मीडिया पर भी जब आप एक समूह द्वारा हर तरह से खारिज़ कर दिए जाते हैं क्योंकि आप अकेले हैं और आसान शिकार हैं। समूहों में भी ये होता है। ये जेंडर न्यूट्रल है पूरी तरह से और कोई भी शोषक और शोषित की भूमिका में हो सकता है। किसी भी जेंडर का इंसान इसका शिकार हो सकता है। आदमी, औरत या कि एलजीबीटी समुदाय।

(यह लेख उदयपुर (राजस्थान) की काउन्सलर एवं लेखिका भारती गौड़ द्वारा लिखा गया है।)

Posted By: Navodit Saktawat

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 
Show More Tags