
जिंदगी भर गांधीजी ने कपड़ों के मामले में मितव्ययिता बरती और उनका दिया खादी का मन्त्र आज भी लोगों के बीच उतना ही चर्चित है। एक साधारण, मोटा, खुरदुरा यह कपड़ा आज फैशन स्टेटमेंट बन चुका है। चलिए जानें इस कपड़े का स्वास्थ्य से जुड़ा ताना-बाना।
पहनावा और सेहत
शायद कभी आपने इस बात पर गौर न किया हो लेकिन परिधान का सीधा संबंध शारीरिक ही नहीं मानसिक सेहत से भी होता है। गलत तरीके से या खराब गुणवत्ता के परिधान लम्बे समय तक पहनने से न केवल शरीर को नुकसान पहुंच सकता है बल्कि इसका असर दिमाग तक भी हो सकता है। मानव शरीर की संरचना इस प्रकार की है कि किसी भी नुकसान पहुंचाने वाली बाहरी चीज का असर उस पर बाहरी और भीतरी दोनों स्तरों पर पड़ता है।
खादी का असर
एक ऐसा कपड़ा जिसने न केवल परिधान बनकर बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौर में बकायदा क्रांति का साधन बनकर धूम मचाई। इस एक कपड़े के जरिए गांधीजी ने लोगों के समूह को जोड़ा और आंदोलन के लिए प्रेरित किया। स्वदेशी का वह आंदोलन स्वराज का द्योतक बन गया। गांधीजी ने लोगों को उत्साहित करते हुए कहा था, आप मेरे हाथ में खादी लाकर रख दीजिए, मैं आपके हाथ में स्वराज रख दूंगा।
मौसम के अनुकूल खादी
सामान्यत: शुरुआत में खादी कॉटन से बनाया जाने वाला कपड़ा था लेकिन इसमें बाद में सिल्क और ऊन को भी मिक्स किया जाने लगा। अब तो फैशन इंडस्ट्री खादी के लिए और भी कई मटेरियल मिक्स करके उत्पाद बनाने लगी है। खादी की एक सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कपड़ा सर्दी में गरम और गर्मी में ठंडा होता है जिससे मौसम के असर से बहुत हद तक राहत मिलती है। हालांकि सिर्फ खादी से बने कपड़ों से थोड़ी चुभन और खुरदरेपन का एहसास हो सकता है लेकिन अब इसके लिए भी अन्य मटेरियल्स को मिक्स करके चुभन को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
त्वचा को हैं कई लाभ
खादी के वस्त्र चूंकि मौसम के लिहाज से बर्ताव करते हैं, लिहाजा त्वचा के लिए भी ये दोस्त साबित होते हैं। त्वचा तक इनके मध्यम से हवा पहुंच सकती है तथा पसीना सोखने में मदद मिलती है। इसके कारण शरीर में नमी इकट्ठी होने के चांस कम हो जाते हैं और इन्फेक्शन या त्वचा सम्बन्धी दिक्कतें भी कम परेशान करती हैं। यही नहीं यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।
यूं भी गर्म और चिपचिपे मौसम के लिहाज से कॉटन से बने परिधानों को सर्वोत्तम माना जाता है और हमारे देश में ज्यादातर समय इसी तरह का मौसम होता है। ऐसे खादी के वस्त्र लाभदायक साबित होते हैं। यही नहीं अच्छे कॉटन से बनी खादी लम्बे समय तक साथ देती है।
परिधान के अलावा लाभ
खादी का उपयोग गांधीजी के समय में तो लोग करते ही थे आज भी दुनियाभर में यह अपने गुणों के कारण प्रसिद्द है। इसे बच्चों से लेकर बड़ों के कपड़े बनाने के अलावा चादर, तकियों की खोल आदि बनाने में भी काम में लिया जाता था। इस मामले में भी यह स्वास्थ्य से जुड़ती थी क्यूंकि सर्द मौसम में तो इसका गर्म रहने का गुण चादर के रूप में ठंड को शरीर तक पहुंचने से रोकता ही था गर्मी के दिनों में यह सोते समय भी दिमाग और शरीर दोनों को शांति का अनुभव कराता था।