
लाइफस्टाइल डेस्क, इंदौर। अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis) एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसमें शौच के दौरान मल के साथ खून आने लगता है। इसके अलावा लगातार पेट दर्द और दस्त की समस्या बनी रहती है। Ulcerative Colitis की समस्या बड़ी आँत में सूजन और घाव के कारण होती है, जिसे अल्सर भी कहा जाता है। यह एक गंभीर बीमारी है, जिसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन नियंत्रित किया जा सकता है। Ulcerative Colitis एक तरह का इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज है। इस बीमारी के बारे में ज्यादा जानकारी दे रहे हैं इंदौर स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हीपैटोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. अमोल शिंदे।
अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या आमतौर पर ऐसे लोगों में ज्यादा देखी जाती है, जिनके शरीर की इम्युनिटी बेहद कम होती है। इसके अलावा यह बीमारी आनुवांशिक कारणों से भी हो सकती है। Ulcerative Colitis होने पर ये प्रमुख लक्षण दिखाई देते हैं।

Ulcerative Colitis जैसी बीमारी का पता करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर सिग्मोइडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी जैसे टेस्ट करते हैं। इस टेस्ट में डॉक्टर मरीज के मलाशय में एक पतली ट्यूब डालते हैं और इसे बड़ी आंक में ले जाते हैं। ट्यूब के एक कैमरा होता है, जिससे बड़ी आँत के अंदर देखा जा सकता है। इस दौरान टिश्यू के नमूने भी माइक्रोस्कोप के जरिए देखे जाते हैं। इसके अलावा ब्लड टेस्ट, स्टूल टेस्ट के जरिए भी इस बीमारी को पहचाना जाता है।
इस बीमारी को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन डाइट के साथ कुछ दवाओं के सेवन से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। दवाओं के सेवन से बड़ी आंत और मलाशय की सूजन को कम किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ इम्यूनिटी बूस्टर दवाओं का भी सेवन करना पड़ता है। कुछ विशेष परिस्थिति में जब दवा काम नहीं करती है तो मरीज की सर्जरी भी करना पड़ती है। अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित लोगों संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए। दूध, दही या फाइबर युक्त डाइट का सेवन ज्यादा करना चाहिए। ज्यादा तेल या वसायुक्त भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।