
एजेंसी, नई दिल्ली। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होने का फैसला लिया है। सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अधीर रंजन चौधरी को निमंत्रण दिया गया था, लेकिन इन नेताओं ने इसे भाजपा और आरएसएस का कार्यक्रम बताते हुए आने से इनकार कर दिया।
इसके बाद कांग्रेस में बवाल शुरू हो गया है। पार्टी प्रवक्ता आचार्य प्रमोद कृष्णम् और गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन मोढवाडिया ने खुलकर विरोध किया है। पढ़िए बयानबाजी
भगवान राम सबके हैं। उनको भाजपा का या आरएसएस का मानना गलत है। इस फैसले से मेरा दिल टूटा है। लाखों कांग्रेसियों का दिल टूटा है। यह पार्टी के चंद नेताओं द्वारा लिया गया फैसला है। - आचार्य प्रमोद कृष्णम्
.jpg)
भगवान श्री राम आराध्य देव हैं। यह देशवासियों की आस्था और विश्वास का विषय है। कांग्रेस को ऐसे राजनीतिक निर्णय लेने से दूर रहना चाहिए था। - अर्जुन मोढवाडिया, गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और युवा एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, जो कांग्रेस अयोध्या में भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बायकाट कर रही है, उसका 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता बायकाट करेगी। कांग्रेस का चाल, चरित्र और चेहरा कभी नहीं बदल सकता। यह वही कांग्रेस है जिसने शपथपत्र देकर श्रीराम को काल्पनिक बताया था। यह वही कांग्रेस है जिसने वादा किया था कि हम उसी जगह पर फिर बाबरी मस्जिद बनवाएंगे। यह वही कांग्रेस है जिसने रामलला का मंदिर न बने इसके लिए वकीलों की फौज खड़ी की थी। यह वही कांग्रेस है जो रामसेतु से लेकर श्रीराम से जुड़ी प्रत्येक बात का विरोध करती आई है।
इस बीच, भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है। पार्टी नेताओं ने कांग्रेस पर चौतरफा हमले करते हुए इसे एंटी हिंदू बताया। आरोप है कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण की खातिर निमंत्रण ठुकरा दिया। यह महात्मा गांधी की कांग्रेस नहीं है। यह जवाहरलाल नेहरू की कांग्रेस है जो हिंदू धर्म के खिलाफ है।
कर्नाटक भाजपा के नेता सीटी रवि ने दावा किया कि भारत के पहले प्रधानमंत्री और दिवंगत कांग्रेस आइकन नेहरू ने गुजरात के प्राचीन सोमनाथ मंदिर जाने से इनकार कर दिया था।
उन्होंने कहा, 'कांग्रेस हमेशा से हिंदुत्व के खिलाफ रही है। सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल, बाबू राजेंद्र प्रसाद और केएम मुंशी द्वारा किया गया था। उस समय जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। वह सोमनाथ नहीं गए। ऐसे में कांग्रेस का वर्तमान नेतृत्व अयोध्या कैसे जा सकता है।