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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 04, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Weather Update: इस बार पहले दस्तक देगी ठंड, जानें आखिर क्यों है मौसम का मिजाज, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Weather Alert: इस साल उत्तर भारत में असामान्य रूप से ज्यादा बारिश ने मौसम का पैटर्न बदल दिया है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पश्चिमी विक्षोभ और ला-नीन...और पढ़ें

By ADITYA KUMAREdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 04 Sep 2025 05:45:27 AM (IST)Updated Date: Thu, 04 Sep 2025 08:40:53 AM (IST)
Weather Update: इस बार पहले दस्तक देगी ठंड, जानें आखिर क्यों है मौसम का मिजाज, पढ़ें पूरी रिपोर्ट
Weather Alert: आखिर क्यों है मौसम का मिजाज?

HighLights

  1. उत्तर भारत में औसत से कई गुना अधिक बारिश दर्ज हुई।
  2. पश्चिमी विक्षोभ और ला-नीना के चलते ठंड समय से पहले आ सकती है।
  3. 2022 की तरह इस साल भी सितंबर-अक्टूबर में जल्दी बर्फबारी संभव।

नेशनल डेस्क, नई दिल्ली। मानसून के आखिरी दौर में उत्तर भारत में हो रही भारी बारिश और बाढ़ का असर अब आने वाले मौसम (Weather Alert) पर भी पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा होने पर तापमान तेजी से गिरता है। अगर मानसून की विदाई के तुरंत बाद *पश्चिमी विक्षोभ* सक्रिय हो गया, तो उसकी नमी जल्द ही बर्फ में बदल सकती है। यही वजह है कि इस साल ठंड अपने तय समय से पहले दस्तक दे सकती है।

असामान्य पैटर्न का संकेत

अगस्त और सितंबर में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में औसत से सात से आठ गुना अधिक बारिश दर्ज की गई है। लगातार बरसात और नमी से भरी जमीन के चलते इस बार मैदानों में कोहरा और पाला भी समय से पहले पड़ सकता है। इसका असर फसलों और यातायात दोनों पर देखने को मिल सकता है।


लंबा खिंच सकता है मानसून

भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार आमतौर पर मानसून की वापसी सितंबर के अंत तक हो जाती है। लेकिन इस बार उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश एक हफ्ता देर तक जारी रह सकती है। उदाहरण के तौर पर, शिमला में सितंबर के पहले दो दिनों में ही औसत से 200% अधिक वर्षा दर्ज की गई। इसका मतलब है कि मिट्टी और हवा में नमी लंबे समय तक बनी रहेगी। जैसे ही तापमान गिरेगा, यह नमी पहाड़ों में जल्दी बर्फबारी का कारण बन सकती है।

ला-नीना का असर

निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट के अनुसार, सितंबर से नवंबर के बीच प्रशांत महासागर में ला-नीना की स्थिति बनने की संभावना है। भारत में इसका सीधा असर पड़ेगा और तापमान सामान्य से तीन से पांच डिग्री तक गिर सकता है।

बदल रहा सर्दी का कैलेंडर

आईएमडी के आंकड़े बताते हैं कि पहाड़ों में सर्दी का कैलेंडर लगातार बदल रहा है। 2021 में अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही बर्फबारी हुई थी, जबकि 2022 में 20 सितंबर को केदारनाथ और यमुनोत्री बर्फ से ढक गए थे। आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि जब-जब सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश हुई है, अक्टूबर की शुरुआत में ही ठंड महसूस होने लगी है।

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