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डिजिटल डेस्क। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval ने कहा है कि भारत को केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में खुद को इतना मजबूत बनाना होगा कि देश दोबारा किसी तरह की गुलामी या हमले का शिकार न बने। उन्होंने कहा कि भारत के दर्दनाक इतिहास से मिले सबक को भूलना भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
‘विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद’ के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए डोभाल ने कहा कि आज के युवा सौभाग्यशाली हैं, क्योंकि वे स्वतंत्र भारत में जन्मे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि देश की आज़ादी के लिए Mahatma Gandhi, Subhas Chandra Bose और Bhagat Singh जैसे महान नेताओं ने अपार कष्ट झेले और अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए।
आजादी आसान नहीं थी
डोभाल ने कहा कि आजादी आसान नहीं थी। किसी को फांसी पर चढ़ना पड़ा, किसी ने जीवनभर संघर्ष किया और किसी ने सत्याग्रह के रास्ते पर चलकर देश को आज़ादी दिलाई। ऐसे में आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी है कि वे उस बलिदान की कीमत समझें।
पूर्व खुफिया प्रमुख ने कहा कि ‘प्रतिशोध’ शब्द भले ही कठोर लगे, लेकिन यह आत्मसम्मान और आत्मरक्षा की शक्ति का प्रतीक भी हो सकता है। भारत को अपने इतिहास से सीख लेते हुए फिर से उस ऊंचाई पर पहुंचना होगा, जहां वह सिर्फ सैन्य ताकत में ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, समाज और विकास के हर मोर्चे पर मजबूत बने।
डोभाल ने युवाओं को भविष्य का नेतृत्वकर्ता बताते हुए मजबूत नेतृत्व की भूमिका पर जोर दिया और कहा कि जैसा नेतृत्व आज Narendra Modi दिखा रहे हैं, वैसा नेतृत्व ही देश को दिशा देता है। उन्होंने नेपोलियन के कथन का हवाला देते हुए कहा कि नेतृत्व कमजोर हो तो ताकत भी बेकार हो जाती है, लेकिन मजबूत नेतृत्व साधारण लोगों को भी असाधारण बना देता है।
सुरक्षा को नजरअंदाज करने की भारी कीमत
उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक शांतिप्रिय और प्रगतिशील सभ्यता रहा है। हमने कभी दूसरे देशों की संस्कृति या धार्मिक स्थलों पर आक्रमण नहीं किया, लेकिन इतिहास में कई बार सुरक्षा को नजरअंदाज करने की भारी कीमत चुकानी पड़ी। सवाल यह है कि क्या हमने वह सबक याद रखा?
डोभाल ने चेताया कि अगर युवा पीढ़ी इतिहास से मिली सीख को भूल गई, तो यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में होने वाले लगभग सभी संघर्षों की जड़ में सुरक्षा की चिंता होती है। कोई भी युद्ध केवल हिंसा के लिए नहीं होता, बल्कि अपनी शर्तें मनवाने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लड़ा जाता है।
हर देश अपनी रक्षा को सर्वोपरि मान रहा
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखें तो साफ है कि हर देश अपनी रक्षा को सर्वोपरि मान रहा है। भारत को भी यही करना होगा- सतर्क रहकर, संगठित होकर और आत्मनिर्भर बनकर। यही भावना देश को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।