
डिजिटल डेस्क, पटना। जमीन के बदले नौकरी घोटाले में राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआइ अदालत ने अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके पुत्र तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, पुत्री मीसा भारती सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने क्या कहा
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि आरोपितों के खिलाफ सुनवाई योग्य मामला बनता है। कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार यह प्रकरण अलग-अलग सौदों तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि एक संगठित आपराधिक गतिविधि की ओर संकेत करता है। आदेश में यह भी कहा गया कि सभी आरोपितों की भूमिकाएं आपस में जुड़ी प्रतीत होती हैं और उन्होंने साझा उद्देश्य के साथ काम किया।
सीबीआई ने अदालत में क्या बताया
सीबीआइ ने अदालत को बताया कि रेलवे में नियुक्तियों के बदले अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। यह जमीन कथित तौर पर लालू परिवार के सदस्यों या उनसे संबंधित संस्थाओं के नाम ट्रांसफर कराई गई। जांच एजेंसी के मुताबिक नौकरी, जमीन और संपत्ति के लेनदेन को एक सुनियोजित ढांचे के तहत जोड़ा गया था।
आदेश के बाद अब मामले में नियमित ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें गवाहों की पेशी और साक्ष्यों की जांच की जाएगी। अदालत ने बचाव पक्ष की उस दलील को स्वीकार नहीं किया, जिसमें पर्याप्त सबूत न होने की बात कही गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस चरण पर केवल यह परखा जाता है कि अभियोजन के पास मुकदमा चलाने लायक सामग्री है या नहीं, और इस कसौटी पर अभियोजन सफल रहा है।
क्या है जमीन के बदले नौकरी मामला
यह मामला उस अवधि से जुड़ा बताया जाता है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। सीबीआइ के अनुसार, रेलवे के ग्रुप-डी समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियों के बदले कुछ अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। ये जमीनें कथित तौर पर बेहद कम कीमत पर या बिना समुचित भुगतान के लालू परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम दर्ज कराई गईं। जांच में यह भी सामने आया कि यह तरीका किसी एक-दो नियुक्तियों तक सीमित नहीं था, बल्कि एक पैटर्न के रूप में अपनाया गया।
इस प्रकरण में सीबीआइ ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था। लंबी सुनवाई के बाद अब अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं।
राजनीतिक हलचल तेज
अदालत के फैसले के बाद बिहार की राजनीति में गतिविधियां बढ़ गई हैं। विपक्ष ने इसे कानून के राज की पुष्टि बताया है, जबकि आरजेडी की ओर से इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताने के संकेत मिलते रहे हैं। हालांकि अदालत ने साफ किया है कि आगे की कार्यवाही कानून और साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई पर सबकी निगाहें रहेंगी।
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