Manipur Violence: इंफाल में बर्बरता की शिकार कुकी युवती ने तोड़ा दम, ढाई साल तक दर्द और न्याय के इंतजार के बीच मौत से हार गई जंग
मणिपुर में मई 2023 से जारी मैतेई–कुकी जातीय हिंसा के बीच एक कुकी समुदाय की युवती के साथ हुई बर्बरता का मामला एक बार फिर सामने आया है। इंफाल से अगवा कर ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 18 Jan 2026 03:03:55 PM (IST)Updated Date: Sun, 18 Jan 2026 03:03:55 PM (IST)
मणिपुर हिंसा डिजिटल डेस्क। मणिपुर में मई 2023 से जारी मैतेई–कुकी जातीय हिंसा के बीच एक कुकी समुदाय की युवती के साथ हुई बर्बरता का मामला एक बार फिर सामने आया है। इंफाल से अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म की शिकार बनी इस महिला की हाल ही में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि उसकी मौत उन शारीरिक और मानसिक चोटों का परिणाम है, जो उसने उस भयावह घटना के दौरान झेली थीं। परिवार ने यह भी कहा कि समय पर न्याय न मिल पाने से उसका दर्द और गहरा हो गया।
मई 2023 में इंफाल से किया गया था अपहरण
हिंसा भड़कने के दौरान मई 2023 में इस 20 वर्षीय महिला को इंफाल से अगवा किया गया था। एफआईआर के मुताबिक, हथियारों से लैस चार लोगों ने उसे जबरन एक पहाड़ी इलाके में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद उसे मरने के लिए छोड़ दिया गया।
गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची थी पीड़िता
काफी प्रयासों के बाद वह किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रही। सब्जियों के ढेर में छिपकर वह एक ऑटो चालक की मदद से कांगपोकपी पहुंची, जहां से उसे इलाज के लिए कोहिमा रेफर किया गया। राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी होने के कारण करीब दो महीने बाद 21 जुलाई को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जा सकी।
इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने बयान जारी कर बताया कि पीड़िता को लैंगगोल ले जाया गया था और बाद में बिष्णुपुर में छोड़ दिया गया। संगठन के अनुसार, उसे गंभीर शारीरिक चोटें, मानसिक आघात और गर्भाशय से जुड़ी जटिलताएं हो गई थीं। गुवाहाटी में इलाज के दौरान 10 जनवरी 2026 को उसकी मौत हो गई।
परिवार में मातम
पीड़िता की मां ने न्यूजलॉन्ड्री से बातचीत में बताया कि घटना के बाद उनकी बेटी की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। मां के मुताबिक, जो बेटी कभी हमेशा मुस्कुराती रहती थी, वह इस घटना के बाद टूट गई थी।
मणिपुर में हिंसा का कहर
भूमि अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को लेकर भड़की मणिपुर हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 50 हजार लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। आईटीएलएफ ने पीड़िता की याद में कैंडल मार्च आयोजित करने का ऐलान किया है।
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