मैनपुरी। उप्र के विधानसभा चुनाव में सपा की करारी हार से व्यथित मुलायम सिंह यादव के दिल की बात शनिवार को जुबां पर आ ही गई। कहा कि अब जितना अपमान हुआ, उतना पहले कभी नहीं हुआ। ये अपमान भी अपनों ने ही दिया। "जो अपने बाप का नहीं हुआ, वो किसी का नहीं हो सकता" मोदी को ये कहने का मौका अपनों ने ही दिया और इसीलिए सपा बुरी तरह से चुनाव हार गई।

अपने सियासी दाव-पेंच से विरोधियों को धोबीपाट देने वाले नेताजी के शब्दों में राजनीतिक हार की हताशा थी, तो विषम हालातों को भी अपने फौलादी जुनून से मात देने वाले चेहरे पर मायूसी। वह अपनी कर्मभूमि मैनपुरी में पैक्सफेड के अध्यक्ष तोताराम के होटल के उदघाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। परिवार में कलह से लेकर सपा की हार तक के हालातों को लेकर लोगों को मुलायम के दिल की बात सुनने को बेताबी थी।

करीब चालीस मिनट के भाषण में मुलायम के एक-एक शब्द में दिल की टीस उभरती रही। मुलायम ने सीधे-सीधे अपनों पर ही निशाना साधा। कहा कि जितना अपमान अब हुआ, उतना पहले कभी नहीं हुआ। चुनाव के दौरान कन्नौज की सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था- "जो अपने बाप का नहीं हुआ, वो औरों का क्या होगा।"

आखिर मोदी को ये कहने का मौका किसने दिया? नरेंद्र मोदी की इस बात का बहुत असर पड़ा और हम बुरी तरह से चुनाव हार गए। पारिवारिक कलह का खामियाजा हमें भुगतना पड़ा।

मुलायम ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि मोदी को ये कहने का मौका अपने ही दो लोगों ने दिया, हम उनका नाम नहीं लेना चाहते। हम पार्टी के हित में अपमान का घूंट पीते रहे। जब अपने ही सजा हमें देते रहे, तो हम शिकायत किससे करें। मैंने अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाया। कोई बाप अपने बेटे को मुख्यमंत्री नहीं बनाता, लेकिन मैंने बनाया। जो मेरे साथ हुआ, सबके सामने है।

चाचा को मंत्रीमंडल से निकाला

बेहद व्यथित मुलायम सिह ने कहा कि सपा सरकार ने जितना काम किया, उतना किसी ने नहीं किया। उन्होंने अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश ने ऐसा काम किया कि बहुत काम करने वाले अपने चाचा शिवपाल को ही मंत्रीमंडल से निकाल दिया। उन्होंने कहा कि अब हम किसी के बीच में नहीं पड़ेंगे। अभी हम देख रहे हैं कि हमारे लोग क्या चाहते हैं, हम अपने लोगों की भावनाओं को देख फैसला करेंगे।

मंदिर बने या मस्जिद, पहली ईंट मैं रखूंगा

अयोध्या प्रकरण का जिक्र करते हुए मुलायम सिंह ने कहा कि मंदिर बने या मस्जिद, पहली ईंट मैं रखूंगा और ये बात पहले भी कह चुका हूं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सहमति के सुझाव पर कहा कि हमने भी सरकार में रहते हुए कड़े फैसले लिए थे। तब 16 जानें गईं थीं और 84 लोग घायल हुए थे। हमने सहमति बनाने का चार बार प्रयास कि या था। मगर बात नहीं बनी। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करना होगा। कोर्ट का फैसला ही सर्वमान्य होगा।

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