
एजेंसी, नई दिल्ली। संसद में ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) पर जमकर चर्चा हुई। सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, 'मुझे इस बात पर आपत्ति है कि विपक्ष को एक भारतीय विदेश मंत्री पर भरोसा नहीं है, बल्कि किसी और देश पर भरोसा है। मैं उनकी पार्टी में विदेशी का महत्व समझ सकता हूं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी पार्टी की सभी बातें यहां सदन में थोप दी जाएं। यही कारण है कि वे वहां विपक्षी बेंचों पर बैठे हैं और अगले 20 सालों तक वहीं बैठे रहेंगे।'
संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर सबसे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चर्चा की शुरुआत की और बताया कि भारतीय सेना ने कब और कैसे इसे अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि हमले में 100 आतंकी और उनके आका मारे गए हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा- ‘मैं देश के उन वीर सपूतों, बहादुर सैनिकों को नमन करता हूं जो राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा के लिए बलिदान देने से कभी पीछे नहीं हटे... मैं उन सैनिकों की स्मृति को भी नमन करता हूं जिन्होंने भारत की एकता, अखंडता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। मैं पूरे देश की तरफ से सभी जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।’
‘...6 और 7 मई 2025 को भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर के नाम से एक ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। यह केवल सैन्य कार्रवाई नहीं थी बल्कि यह भारत की संप्रभुता, उसकी अस्मिता, देश के नागरिकों के प्रति हमारी जिम्मेदारी और आतंकवाद के खिलाफ हमारी नीति का एक प्रभावी और निर्णायक प्रदर्शन था।’
‘22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में एक अमानवीय और कायराना आतंकी हमला हुआ। इस हमले में हमारे 25 निर्दोष नागरिकों सहित एक नेपाली नागरिक की जान गई थी। उन निर्दोष लोगों की जान उनका धर्म पूछकर लिया गया।’
‘यह अपने आप में अमानवीयता का सबसे घृणित उदाहरण था। ये घटना भारत की सहनशक्ति की सीमा थी। इस हमले के तुरंत बाद हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की और उन्हें छूट दी गई कि वे अपने विवेक, राजनीतिक समझ और क्षेत्रीय स्थिति को देखते हुए निर्णायक कार्रवाई करें।’
‘ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देने से पहले, हमारी सेनाओं ने हर पहलू का गहराई से अध्ययन किया। हमारे पास कई विकल्प थे लेकिन हमने वह विकल्प चुना जिससे आतंकवादियों को अधिकतम नुकसान हो और जिसमें पाकिस्तान के आम नागरिकों को कोई नुकसान न हो।’
‘हमारी सेनाओं द्वारा किए गए समन्वित हमलों ने 9 आतंकवादी बुनियादी ढांचे के ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाया। एक अनुमान के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादी, उनके प्रशिक्षक, उनके आका मारे गए, जिनमें से अधिकांश जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठनों से जुड़े थे।’
‘भारत ने कार्रवाई इसलिए रोकी क्योंकि संघर्ष के पहले और उसके दौरान जो भी राजनीतिक और सैन्य लक्ष्य तय किए गए थे उसे हम पूरी तरह से हासिल कर चुके थे। इसलिए यह कहना कि ऑपरेशन किसी दबाव में रोका गया था यह बेबुनियाद और सरासर गलत है।’

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‘हमारी कार्रवाई पूरी तरह से आत्मरक्षा में थी, न तो उकसावे वाली थी और न ही विस्तारवादी। फिर भी, 10 मई, 2025 को लगभग 1:30 बजे तक, पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर भारत के ऊपर मिसाइलों, ड्रोन्स, रॉकेट्स और अन्य लंबी दूरी के हथियारों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर हमला किया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वॉर फेयर से जुड़ी तकनीक का भी सहारा लिया। उनके निशाने पर हमारे भारतीय सेना के अड्डे, थल सेना के एग्रेशन डीपो, हवाई अड्डे और मिलिट्री कैंप थे।’
‘यह कहते हुए मुझे गौरव की अनुभूति हो रही है कि हमारे यहां डिफेंस सिस्टम, काउंटर ड्रोन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट ने पाकिस्तान के इस हमले को पूरी तरह से नाकाम कर दिया। पाकिस्तान हमारे किसी भी टारगेट को हिट नहीं कर पाया। हमारी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद थी और हर हमले को हमारे द्वारा रोका गया। मैं इसके लिए भारतीय सेना के बहादुर सैनिकों की जमकर सराहना करता हूं, जिन्होंने दुश्मन के मंसूबों पर पानी फेर दिया।’
सदन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की मीटिंग से लेकर पाकिस्तानी दूतावास के सदस्यों को पर्सन ऑफ नॉन ग्रेटा घोषित किए जाने तक, सरकार के कदम गिनाए। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान सुरक्षा काउंसिल का सदस्य है, हम नहीं हैं। हमने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान के बारे में बताया। हमारी रेड लाइन पार कर गई, तब हमें सख्त कदम उठाने पड़े। हमने दुनिया के सामने पाकिस्तान का असली चेहरा बेनकाब किया। सिक्योरिटी काउंसिल में पाकिस्तान समेत केवल तीन देशों ने ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया। यूएन के 193 में से तीन सदस्यों ने ही इस ऑपरेशन का विरोध किया।"
सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'आज सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा होनी थी, लेकिन कांग्रेस के नेताओं में होड़ मची रही कि पाकिस्तान का सबसे करीबी दोस्त और सबसे प्यारा कौन बनकर सामने आए। कल एक पूर्व गृह मंत्री ने जो इंटरव्यू दिया था, उसमें उन्होंने कहा था- अगर इसमें पाकिस्तान का हाथ नहीं है, तो आप कैसे कह सकते हैं कि आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे?" उन्होंने कहा कि कभी वे इसे हिंदू आतंकवाद कहते हैं, कभी वे पाकिस्तान का बचाव करने आ जाते हैं। आज कांग्रेस पार्टी में पाकिस्तान के इतने बड़े पैरोकार हैं कि बाद में पाकिस्तान अपना बचाव करता है, और कांग्रेस के नेता उनका बचाव करने आ जाते हैं।