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डिजिटल डेस्क। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। 5 जनवरी की रात जेएनयू छात्र संघ और वामपंथी संगठनों ने परिसर में केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। साबरमती हॉस्टल के बाहर हुए इस हंगामे के दौरान छात्रों ने जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम के पक्ष में जमकर नारेबाजी की।
यह विरोध प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हुआ। प्रदर्शनकारी छात्रों ने 'न्याय दो' और 'रिहाई दो' के नारे लगाए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर बेहद विवादित और आपत्तिजनक नारे भी लगाए गए, जिस पर अब राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
इस प्रदर्शन को 5 जनवरी 2020 को जेएनयू में हुई हिंसा की छठी बरसी से भी जोड़ा गया। छात्रों और शिक्षकों ने सवाल उठाया कि छह साल बीत जाने के बाद भी नकाबपोश हमलावरों की पहचान क्यों नहीं हो पाई। इसके साथ ही छात्र संघ ने कैंपस में प्रस्तावित 'फेशियल रिकग्निशन सिस्टम' (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) का भी कड़ा विरोध किया। छात्र नेताओं का आरोप है कि प्रशासन इस तकनीक के जरिए छात्रों की जासूसी और उन पर निगरानी रखना चाहता है।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है, लेकिन परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है।
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