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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 08, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Mahakal Mukharvind Patent: भगवान महाकाल के मुखारविंद के पेटेंट की मांग… पधरावनी के नाम पर हो रहा भक्तों के साथ धोखा

उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के भक्तों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। महाकाल मंदिर के पुजारियों ने मंदिर प्रबंधन से मांग की है कि बाबा मह...और पढ़ें

By Arvind DubeyEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Sun, 08 Dec 2024 10:21:11 AM (IST)Updated Date: Sun, 08 Dec 2024 11:22:01 AM (IST)
Mahakal Mukharvind Patent: भगवान महाकाल के मुखारविंद के पेटेंट की मांग… पधरावनी के नाम पर हो रहा भक्तों के साथ धोखा
श्रावण-भादौ में महाकाल की सवारी निकाली जाती है। वहीं से देखकर लोग नकली मुखारविंद बना रहे हैं।

HighLights

  1. कुछ लोगों ने बनवा ली है महाकाल के मुखारविंद की प्रतिकृति
  2. देशभर में पधरावनी के नाम पर इन प्रतिकृति का हो रहा प्रदर्शन
  3. पधरावनी अर्थात भगवान को घर पर आमंत्रित कर पूजा करना

नईदुनिया, उज्जैन (Ujjain Mahakal Mandir News)। महाकाल मंदिर के पुजारियों ने मंंदिर प्रबंध समिति से भगवान महाकाल के मुखारविंदों का पेटेंट कराने की मांग की है। पुजारी का कहना है कि कुछ लोगों ने भगवान महाकाल के मुखारविंदों की प्रतिकृति बना ली है।

यह लोग पधरावनी (घर पर आमंत्रित कर पूजा करना) के नाम पर देश भर में उनका प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आचरण महाकाल मंदिर की धर्म परंपरा, मूर्तियों के महत्व तथा भक्तों की भावना के साथ खिलवाड़ है।

पुजारियों की मांग है कि ऐसे लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज होना चाहिए। साथ ही ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति ना हो सके इसलिए मूर्तियों का पेटेंट करा लेना चाहिए।

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आस्था के नाम पर ऐसे हो रहा धोखा

  • श्रावण-भादौ में महाकाल की सवारी निकाली जाती है। भगवान महाकाल चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, नंदी पर उमा महेश, गरुड़ पर शिव तांडव तथा होलकर, सप्तधान, जटाशंकर स्वरूप में दर्शन देने निकलते हैं।
  • सवारी में शामिल होने के लिए देशभर से हजारों भक्त उमड़ते हैं। यह मुखारविंद धार्मिक व पौराणिक महत्व के होकर धातु से निर्मित है। कुछ स्थानीय व बाहर के लोगों ने मार्बल डस्ट व कुट्टी मिटी के मिश्रण से मुखारविंदों की प्रतिकृति बना ली है।

  • यह लोग भक्तों को भ्रामक जानकारी देकर इन मूर्तियों को पधरावनी के नाम पर घर-घर लेजाकर प्रदर्शन करते हैं। पुजारियों का कहना है कि यह कृत्य मंदिर की परंपरा, मुखारविंदों के महत्व तथा भक्तों की भावना के साथ खिलवाड़ है।
  • बांके बिहारी की मूर्ति मंदिर पहुंचने पर उठा मामला

    दो दिन पहले वृंदावन से कुछ लोग भगवान बांके बिहारी की मूर्ति लेकर उज्जैन आए थे। इस पर पं. महेश पुजारी ने बांके बिहारी मंदिर के पुजारियों से चर्चा की, पुजारियों ने बताया बांके बिहारी मंदिर की ऐसी कोई परंपरा नहीं है। इस पर मामले ने तूल पकड़ा और भगवान महाकाल के मुखारविंदों के प्रदर्शन की बात भी सामने आई। इस पर पुजारियों ने मंदिर प्रशासक से मूर्तियों का पेटेंट कराने की मांग रखी।

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    भक्तों की भावना के साथ खिलवाड़

    इंटरनेट माध्यमों पर ऐसे कई वीडियो देखने को मिल रहे हैं, जिनमें लोग भगवान महाकाल के मुखारविंदों को लोगों के घर ले जाकर एक दिनी उत्सव मनाते नजर आ रहे हैं। जबकि मंदिर में भगवान के मुखारविंदों को सवारी के अलावा कहीं बाहर ले जाने की परंपरा नहीं है। अगर यह लोग महाकाल के नाम पर ऐसा कर रहे हैं, तो भक्तों की भावना के साथ खिलवाड़ व धोखाधड़ी है। - पं.राम पुजारी, मंदिर समिति सदस्य

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    मंदिर प्रशासन बोला- विधि विशेषज्ञों से सलाह ले रहे

    भगवान महाकाल के मुखारविंदों को पेटेंट कराने के संबंध में पुजारियों की मांग प्राप्त हुई है। इस मामले में हम क्या कर सकते हैं, इस संबंध में विधि विशेषज्ञों से राय ली जा रही है। इसमें हम मुखारविंद के अलावा किन किन चीजों को शामिल कर सकते हैं, इस पर भी विचार किया जा रहा है। - गणेश कुमार धाकड़, प्रशासक महाकालेश्वर मंदिर

    क्या होता है पेटेंट

    पेटेंट एक कानूनी अधिकार की तरह है। यह किसी व्यक्ति या संस्थान को किसी विशेष उत्पाद, खोज, डिजाइन, सेवा पर एकाधिकार देता है। यानी पेटेंट प्राप्त करने वाले व्यक्ति के अलावा यदि कोई अन्य व्यक्ति अथवा संस्थान इसका उपयोग (बिना अनुमति) करता है तो यह कानूनन अपराध माना जाता है।

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