
धर्म डेस्क। भारतीय घरों के मुख्य द्वार पर अक्सर आपने काले लोहे की एक 'U' आकार की वस्तु टंगी देखी होगी, जिसे घोड़े की नाल (Horseshoe) कहा जाता है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक पशु के पैर की नाल घर के सौभाग्य से कैसे जुड़ सकती है?
वास्तु शास्त्र और लोक मान्यताओं के अनुसार, घोड़े की नाल केवल लोहे का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि घर की सकारात्मक ऊर्जा के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच है। आइए समझते हैं इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक आधार।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लोहा शनि देव की प्रिय धातु है। माना जाता है कि घोड़े की नाल में शनि के कुप्रभावों को शुभता में बदलने की शक्ति होती है। आग में तपकर और बार-बार चोट सहकर तैयार हुआ लोहा नकारात्मकता को सोख लेता है। यही कारण है कि इसे शनिवार के दिन घर के मुख्य द्वार पर लगाना सबसे ज्यादा फलदायी माना गया है।
घोड़े की नाल का आकार उगते हुए चंद्रमा (Crescent Moon) जैसा होता है। वास्तु और फेंगशुई विशेषज्ञों के अनुसार, इसके लगाने के तरीके का गहरा महत्व है:
बाजार में मिलने वाली नई नाल के मुकाबले घोड़े के पैर से खुद निकलकर गिरी हुई पुरानी नाल को सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है। इसके पीछे तर्क यह है कि वह नाल लंबे समय तक पृथ्वी के संपर्क में रही है और उसमें घोड़े की संघर्षशील ऊर्जा समाहित है। ऐसी नाल घर में 'विजय' और 'स्थिरता' का संचार करती है।
अगर आप भी अपने घर में सुख-शांति और व्यापार में वृद्धि चाहते हैं, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें:
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घोड़े की नाल श्रद्धा और विश्वास का विषय है। विज्ञान की दृष्टि से देखें तो द्वार पर लगा चुंबकीय लोहा और उसका विशिष्ट आकार घर के ऊर्जा क्षेत्र (Energy Field) को संतुलित करने में सहायक होता है। यदि आपके जीवन में अकारण बाधाएं आ रही हैं या घर में कलह का वातावरण रहता है, तो विधि-विधान से लगाई गई एक नाल आपके भाग्य का द्वार खोल सकती है।
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