• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • धर्म
  • कहते हैं

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Ketu Mahadasha: केतु की महादशा 7 साल की होती है, जानिए इसका प्रभाव और उपाय

Ketu Mahadasha: वैदिक ज्योतिष में 6 नक्षत्रों में पैदा हुए व्यक्ति को गंडमूल नक्षत्र का माना गया है। इनमें तीन नक्षत्र यथा अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्र...और पढ़ें

By Kushagra ValuskarEdited By: Kushagra Valuskar
Publish Date: Wed, 16 Nov 2022 10:17:46 AM (IST)Updated Date: Wed, 16 Nov 2022 10:17:46 AM (IST)
Ketu Mahadasha: केतु की महादशा 7 साल की होती है, जानिए इसका प्रभाव और उपाय
Ketu Mahadasha: वैदिक ज्योतिष में 6 नक्षत्रों में पैदा हुए व्यक्ति को गंडमूल नक्षत्र का माना गया है। इनमें तीन नक्षत्र यथा अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्र केतु के आधिपत्य के नक्षत्र हैं। इन नक्षत्रों को जातक के लिए नहीं बल्कि माता-पिता के लिए कष्टदायक बताया गया है।

Ketu Mahadasha: छाया ग्रह केतु की महादशा 7 वर्ष की होती है। इस दौरान शुभ या अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। यह परिणाम कुंडली में केतु की स्थिति पर निर्भर है। यदि कुंडली में केतु उत्तम स्थिति में है, तो जातक की आध्यात्मिकता में दिलचस्पी बढ़ती है। आकस्मिक रूप से लाभ होता है। मान-सम्मान, पराक्रम व साहस में बढ़ोतरी होती है। केतु महादाशा के दौरान मन में सांसारिक विषयों के प्रति अरुचि जागृत करता है। मनुष्य की आध्यात्मिक गतिविधियां बढ़ जाती है और तीर्थ यात्राएं करने का मौका मिलता है। यदि केतु वृश्चिक या धनु राशि में शुभ भावों में स्थित है, तो जातक सफलता की बुलंदियों को छूता है। अगर केतु अशुभ स्थिति में है तो जटिल रोग, हादसा, और आकस्मिक रूप से हानि हो सकती है। परिवार से अलगाव हो सकता है। पद-प्रतिष्ठा में गिरावट हो सकती है। सेहत पर नकारात्मत असर पड़ सकता है।

केतु की महादशा का प्रभाव

वैदिक ज्योतिष में 6 नक्षत्रों में पैदा हुए व्यक्ति को गंडमूल नक्षत्र का माना गया है। इनमें तीन नक्षत्र यथा अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्र केतु के आधिपत्य के नक्षत्र हैं। इन नक्षत्रों को जातक के लिए नहीं बल्कि माता-पिता के लिए कष्टदायक बताया गया है। गंडमूल नक्षत्र में पैदा हुए जातक के जन्म के 27 दिन के अंदर नक्षत्र पूजा करनी चाहिए। लग्न में केतु वाला व्यक्ति चिड़चिड़े स्वभाव का होता है। यदि केतु के नक्षत्र में कई ग्रह हों तो जातक अतिमहत्वाकांक्षी होता है।


केतु की महादशा के उपाय

- केतु को शांत करने के लिए किसी भिखारी को वस्त्र दान करें।

- केतु ग्रह यदि कुंडली में अशुभ स्थिति में हो तो काली गाय दान करना चाहिए।

- घर के दक्षिण पश्चिम कोने में तिकोनी ध्वजा लगाए।

- कुत्तों को तेल से चुपड़ी रोटी खिलाएं। ऐसा करने से केतु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

- मंत्र ऊँ कें केतवे नमः का प्रतिदिन 108 बार जाप करें।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'

यह भी पढ़ें-

लाल चंदन के उपाय से शनि होंगे शांत, साढ़े साती और ढैय्या से भी मिलेगी राहत

आटा गूंथते समय न करें ये काम, पूरे परिवार पर पड़ सकता है भारी

कुंडली में कमजोर बुध जीवन में लाता है कई परेशानियां, इन उपायों से मिलेगा लाभ

बेहद चमत्कारी हैं तुलसी पानी के ये उपाय, जाग जाएगा सोया हुआ भाग्य