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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 22, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Ujjain Mahakal Mandir: उज्जैन में धरती फाड़कर प्रकट हुए थे भगवान शिव, राक्षस के संहार के बाद कहलाए बाबा महाकाल, पढ़ें पौराणिक कथा

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। यह 12 ज्योतिर्लिंग में से तीसरे स्थान पर है। यह एकमात्र ज्योर्तिलिंग है, तो दक्षिणमुखी है...और पढ़ें

By Bharat MandhanyaEdited By: Bharat Mandhanya
Publish Date: Mon, 22 Jul 2024 11:56:43 AM (IST)Updated Date: Mon, 22 Jul 2024 01:43:14 PM (IST)
Ujjain Mahakal Mandir: उज्जैन में धरती फाड़कर प्रकट हुए थे भगवान शिव, राक्षस के संहार के बाद कहलाए बाबा महाकाल, पढ़ें पौराणिक कथा
महाकाल मंदिर का पुराणों में भी मिलता है उल्‍लेख।

HighLights

  1. भगवान शिव ने दूषण राक्षस का किया था अंत
  2. भक्तों के आग्रह के बाद उज्जैन में हुए विराजित
  3. बाबा महाकाल के दर्शन से मोक्ष होता है प्राप्‍त

Ujjain Mahakal Mandir धर्म डेस्क, इंदौर। आज से पवित्र सावन माह की शुरुआत हो चुकी है। देश में भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंग है। इन सभी का अपना अपना महत्व है और इन सभी से पौराणिक कथा जुड़ी है। सावन माह में इन सभी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। भगवान शिव का प्रमुख और तीसरा ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है, जिसे महाकालेश्वर के नाम से जाता है। आपको इस ज्योतिर्लिंग के धार्मिक महत्व के बारे में बताते हैं।

ये है पौराणिक कथा

हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार, रत्नमाल पर्वत पर दूषण नामक राक्षस रहता था। ब्रह्मा से मिले आशीर्वाद के कारण वह धर्म का पालन कर रहे लोगों को परेशान करता था। वरदान के मद में चूर होकर व‍ह उज्जैन के ब्राह्मणों पर भी आक्रमण करने लगा और कर्मकांड में बाधा डालने लगा।


राक्षस से त्रस्त होकर ब्राह्मणों ने भगवान शिव से दूषण से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। जिसके बाद भगवान शिव ने राक्षस को आक्रमण रोकने की चेतावनी दी।

लेकिन राक्षसों ने ब्राह्मणों पर आक्रमण कर दिया, जिसके बाद महादेव धरती फाड़कर प्रकट हुए और दूषण राक्षस को भस्म कर दिया। भक्तों ने भगवान शिव से इसी स्थान पर रुकने के लिए आग्रह किया, जिसके बाद भगवान वहां विराजमान हो गए और महाकाल कहलाए।

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एकमात्र दक्षिणमुखी है ज्योतिर्लिंग

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर एकमात्र ज्योतिर्लिंग है, जो दक्षिण मुखी है। इसका तंत्र साधना के लिहाज से भी विशेष महत्व है। मान्‍यता है कि बाबा महाकाल के दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

धरती का केंद्र बिंदु है उज्जैन

भौगोलिक दृष्टि से भी उज्‍जैन का विशेष महत्व है। यह पृथ्वी का केंद्र माना जाता है। इसके साथ ही शास्त्रों में भी उज्जैन को देश का नाभि स्थल कहा गया है।