
धर्म डेस्क। इस बार 25 अक्टूबर, रविवार के दिन शरद पूर्णिमा आ रही है। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग में शरद पूर्णिमा पर अमृत बरसेगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया इस दिन कई अत्यंत दुर्लभ व शुभ योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग: 25 अक्टूबर को शाम सात बजकर 22 मिनिट से लेकर अगले दिन (26 अक्टूबर) सुबह छह बजकर29 मिनिट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा (जो अश्विनी और रेवती नक्षत्र के संयोग से बन रहा है।
तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है, जिससे वृषभ, कन्या और मकर राशि वालों को विशेष आर्थिक लाभ और उन्नति के योग मिलेंगे। इस दिन हर्षन और वज्र योग का भी संयोग रहेगा।
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अग्नि राशि (मेष, सिंह, धनु)
पूर्व दिशा
पूर्व दिशा, जिस पर सूर्य का राज है, इन राशियों की आग जैसी एनर्जी को बैलेंस करती है। शांति, सुकून और खुशहाली लाने के लिए खीर को केसर के रेशों के साथ सिरेमिक बाउल में रखें।
पृथ्वी राशि (वृष, कन्या, मकर)
दक्षिण-पूर्व दिशा
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) पृथ्वी की स्थिर एनर्जी को आग की चिंगारी के साथ मिलाता है। यह जगह ग्रोथ, पैसा और इमोशनल स्टेबिलिटी लाती है। ग्राउंडिंग एनर्जी को मज़बूत करने के लिए बाउल के पास तुलसी का पत्ता या मेटल का सिक्का रखें।
वायु राशि (मिथुन, तुला, कुंभ)
उत्तर-पश्चिम दिशा
उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) तालमेल और कम्युनिकेशन को बढ़ाता है। यहाँ खीर रखने से मन शांत होता है और इमोशन बैलेंस होते हैं। रिश्तों में शांति और समझ बढ़ाने के लिए चाँद की ओर मुँह करके घी के दो दीपक जलाएँ।
पानी की राशि (कर्क, वृश्चिक, मीन)
उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा
यह पवित्र दिशा, जिस पर बृहस्पति और भगवान शिव का राज है, हीलिंग और आध्यात्मिक विकास में मदद करती है। खीर को चाँदी या कांच के कटोरे में रखें ताकि चाँद की सुकून देने वाली एनर्जी सोख सके और मन की शांति बढ़ सके।
जो लोग अपनी राशि नहीं जानते उनके लिए
उत्तर-पूर्व दिशा
क्योंकि चाँद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में मीन राशि में होगा, इसलिए उत्तर-पूर्व दिशा हर जगह शुभ हो जाती है। अपने घर में शांति, खुशहाली और दिव्य ज्ञान को बुलाने के लिए अपनी खीर यहाँ रखें।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर पूजा-पाठ, दान, निवेश, संपत्ति की खरीदारी और नए कार्यों का शुभारंभ किया जा सकता है। नौकरी या व्यवसाय में नई जिम्मेदारी संभालने तथा महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए भी इस दिन को शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त का चयन कर सकते हैं।
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