जीवन की हर बाधा का समाधान 'विष्णु सहस्रनाम', 1000 नामों के जाप से मिलेगी सुख, समृद्धि और शांति
Vishnu Sahasranamam: विष्णु सहस्रनाम का उल्लेख महाभारत के 'अनुशासन पर्व' में मिलता है। इसकी रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी। पौराणिक कथा के अनुसार, जब क ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 20 Jan 2026 07:07:09 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Jan 2026 07:07:09 PM (IST)
जीवन की हर बाधा का समाधान 'विष्णु सहस्रनाम'।HighLights
- बृहस्पति दोष से हैं परेशान तो करें 1000 नामों का जाप
- दरिद्रता दूर करने के लिए करें विष्णु सहस्रनाम का पाठ
- जानें गीता के श्लोक और विष्णु सहस्रनाम का गहरा संबंध
धर्म डेस्क। हिंदू धर्म के त्रिदेवों में भगवान विष्णु को सृष्टि का 'पालक' माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, जब कोई भक्त अपनी समस्त चिंताओं को त्याग कर नारायण के चरणों में शरण लेता है, तो उसके योग-क्षेम की जिम्मेदारी स्वयं प्रभु उठा लेते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता के 9वें अध्याय के 22वें श्लोक में श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि जो अनन्य भाव से उनका चिंतन और उपासना करते हैं, वे उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति और रक्षा करते हैं।
प्रभु की कृपा प्राप्त करने के वैसे तो कई मार्ग हैं, लेकिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ सबसे अधिक फलदायी और प्रभावशाली माना जाता है।
भीष्म पितामह का अंतिम उपदेश
विष्णु सहस्रनाम का उल्लेख महाभारत के 'अनुशासन पर्व' में मिलता है। इसकी रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी। पौराणिक कथा के अनुसार, जब कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद भीष्म पितामह शरशय्या (मृत्युशैया) पर लेटे थे, तब उन्होंने धर्मराज युधिष्ठिर को ज्ञान देते हुए बताया था कि कलयुग में समस्त दुखों से मुक्ति का सबसे सरल मार्ग भगवान विष्णु के इन 1000 नामों का जाप ही है।
पाठ करने के 3 विशेष लाभ
धार्मिक दृष्टिकोण से इसके पाठ करने से विशेष लाभ मिलते हैं:
- शीघ्र विवाह के योग: यदि कुंडली में 'गुरु' ग्रह कमजोर होने के कारण विवाह में विलंब हो रहा हो, तो गुरुवार को इस स्तोत्र का पाठ करने से बृहस्पति बलवान होते हैं और विवाह की बाधाएं दूर होती हैं।
- गुरु दोष से निवारण: गुरु दोष के कारण होने वाली कार्य असफलता और स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्ति मिलती है। चूंकि विष्णु साक्षात गुरुओं के गुरु हैं, इसलिए उनकी स्तुति से अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
- लक्ष्मी की प्राप्ति और समृद्धि: नारायण को 'लक्ष्मीपति' कहा जाता है। मान्यता है कि जहां विष्णु सहस्रनाम का गूंज होता है, वहां माता लक्ष्मी स्वयं निवास करती हैं, जिससे घर की दरिद्रता का नाश होता है।
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पूजा की सही विधि और नियम
विष्णु सहस्रनाम का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए इसे विधि-विधान से करना चाहिए:
- स्नान एवं वस्त्र: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें, जो भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं।
- पूजन प्रक्रिया: चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर घी का दीपक जलाएं और उन्हें पीले फूल अर्पित करें।
- वैकल्पिक मार्ग: यदि आप संस्कृत के कठिन श्लोकों का पाठ करने में असमर्थ हैं, तो इसका ऑडियो सुनना भी उतना ही कल्याणकारी माना गया है।
विष्णु सहस्रनाम केवल 1000 नामों का संग्रह नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली मंत्र पुंज है जो साधक के जीवन में सकारात्मकता और मानसिक शांति का संचार करता है।