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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 26, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Nag Panchami पर ऐसे शुरू हुई नागों की पूजा की परंपरा, भगवान कृष्ण से है सीधा संबंध

Nag Panchami 2025: नाग पंचमी का त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है। इस दौरान अलग-अलग परंपराओं का निर्वहन होता है। जैसे- कहीं लोहा गर्म नहीं किया जाता है, तो कहीं दूध नहीं उबाला जाता है। नागपंचमी पर भगवान शिव की उपासना का विशेष फल मिलता है।

By Arvind DubeyEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Sat, 26 Jul 2025 01:40:52 PM (IST)Updated Date: Sat, 26 Jul 2025 01:40:52 PM (IST)
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Nag Panchami पर ऐसे शुरू हुई नागों की पूजा की परंपरा, भगवान कृष्ण से है सीधा संबंध
नागपंचमी पर नाग मंदिरों में विशेष पूजा होती है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 29 जुलाई, मंगलवार को मनाया जाएगा नागपंचमी पर्व
  2. नाग देवता की पूजा होती है, मंदिर में उमड़ती है भीड़
  3. कछुआ, मत्स्य सहित अन्य जीवों की भी होती है पूजा

नईदुनिया, ग्वालियर। सनातन धर्म में प्रकृति पूजा का महत्व अनादिकाल से हैं। नदियां, जल सरोवर सहित पर्वतों के साथ पीपल, वटसावित्री, बेलपत्र, आंवला सहित अन्य वृक्षों की पूजा का भी विधान है। वैदिक काल से लेकर आज तक पांच तत्व अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी और आकाश की देव के रूप में पूजा होती है।

द्वापर में गोवर्धन पर्वत की पूजा भगवान श्रीकृष्ण ने शुरू कराई। ऐसी मान्यता है कि योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के युमनाजी में वास करने वाले विषधर कालिया नाग का मर्दन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को किया था। तभी से नागपंचमी (Nag Panchami) को विषधर की पूजा की परंपरा शुरू हुई।


इसके साथ ही वर्षा में विषधर बिलों में पानी भरने के कारण अपना स्थान छोड़कर निकलने के लिए मजबूर होते हैं। विषधर के संरक्षण के लिए नागपंचमी को नागदेवता के पूजा की जाती है, क्योंकि यह मानव जाति के दुश्मन नहीं मित्र हैं। सांप स्वयं पर खतरा महसूस होने पर हमला करता है। नागदेवता के अलावा कछुआ, मत्स्य सहित अन्य जीव भी पूजनीय है।

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ग्वालियर के प्रमुख नाग मंदिर

ग्वालियर में नागदेवता का सबसे प्राचीन मंदिर छत्री बाजार स्थित महाराज दौलतराव सिंधिया की छत्री के पास स्थित है। इस मंदिर पर कोई बीजक नहीं होने के कारण इसके निर्माण का कोई ज्ञात इतिहास नही है। इसके अलावा तारगांज,दौलतगंज में भी नागदेवता विराजित हैं। इस वर्ष नागपंचमी 29 जुलाई मंगलवार को मनाई जाएगी।

छत्री बाजार ग्वालियर में स्थित प्राचीन नागदेवता का मंदिर एक रियासत कालीन मंदिर है। मंदिर का कोई ज्ञात इतिहास या शिलालेख उपलब्ध नहीं है, लेकिन माना जाता है कि मंदिर जनकोजीराव सिंधिया के समय में स्थापित हुआ था और नागदेवता के साथ श्रीखंडोवा महाराज भी विराजमान हैं।

छत्री प्रागंण में प्राचीन दक्षिण मुखी हनुमानजी का मंदिर भी है, जिसकी मान्यता रोकड़िया सरकार के रूप हैं। इसके अलावा परंपरागत रूप से शिवालय है। नागदेवता मंदिर की नियमित पूजा जयविलास पैलेस के ट्रस्ट के माध्यम से की जाती है।

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नागपंचमी को लगता है मेला

छत्री बाजार स्थित नागदेवता के मंदिर में नागपंचमी को मेला लगता है। मंदिर से लेकर 500 मीटर के क्षेत्र में आकर्षक विद्युत सज्जा की जाती है। लगभग दो दशक पहले तक सपेरा समाज के लोग विभिन्न प्रकार के नाग अपने पिटारे में रखकर लाते थे। वन विभाग की सख्ती के बाद यह सपेरे परिवार अब नागदेवता का छायाचित्र पिटारे में रखकर मंदिर के बाहर बैठते हैं और श्रद्धालु से दान सामग्री ग्रहण करते हैं।

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