
धर्म डेस्क। आज के आधुनिक घरों में बाथरूम में शीशा होना आम बात है। लोग इंटीरियर और सजावट को सुंदर बनाने के लिए कहीं भी आईना लगवा लेते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की हर छोटी-बड़ी चीज जीवन पर असर डालती है। बाथरूम को नकारात्मक ऊर्जा का स्थान माना जाता है, इसलिए यहां लगे शीशे की दिशा और स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती है।
अगर बाथरूम में आईना गलत जगह लगा हो, तो यह घर की शांति, सेहत और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में जानना जरूरी है कि बाथरूम में शीशा लगाते समय किन वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए।
बाथरूम में शीशा लगाने के सही वास्तु नियम
1. सही दिशा का रखें ध्यान
वास्तु शास्त्र के मुताबिक बाथरूम में आईना पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार पर लगाना शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा में लगा आईना धन और तरक्की से जुड़ा होता है, जबकि पूर्व दिशा स्वास्थ्य और प्रतिष्ठा में सुधार लाने में सहायक मानी जाती है। दक्षिण या पश्चिम दिशा में शीशा लगाने से बचना चाहिए।
2. आईने का आकार भी है जरूरी
बाथरूम में हमेशा चौकोर या आयताकार शीशा लगाना बेहतर होता है। इन आकारों को वास्तु में संतुलन और स्थिरता का प्रतीक माना गया है। गोल या अंडाकार शीशे ऊर्जा के प्रवाह को असंतुलित कर सकते हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
3. सही ऊंचाई पर लगाएं आईना
आईना इस तरह लगाया जाना चाहिए कि उसमें चेहरा पूरा और साफ दिखाई दे। बहुत ऊंचाई या बहुत नीचे लगा शीशा अशुभ माना जाता है। टूटा हुआ या आधा दिखता प्रतिबिंब आत्मविश्वास को कमजोर कर सकता है।
4. दरवाजे के सामने न हो शीशा
बाथरूम के दरवाजे के ठीक सामने आईना लगाने से नकारात्मक ऊर्जा पूरे घर में फैल सकती है। वास्तु के अनुसार दरवाजा खुलते ही जो ऊर्जा बाहर आती है, उसे आईना वापस घर में लौटा देता है, जो शुभ नहीं माना जाता।
5. साफ और सही स्थिति में हो आईना
आईने पर पानी के दाग, धुंध या गंदगी नहीं होनी चाहिए। गंदा या चटका हुआ शीशा नकारात्मकता और आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकता है। अगर आईना टूट गया हो, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए।
बाथरूम में शीशा लगाते समय इन वास्तु नियमों का ध्यान रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
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