
धर्म डेस्क। शादी की तैयारियां केवल कपड़ों और गहनों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि इसकी शुरुआत उस एक 'पीले कार्ड' से होती है जो आपके नए जीवन का संदेश वाहक बनता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि विवाह पत्रिका (Wedding Card) केवल एक निमंत्रण नहीं, बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। यदि इसे वास्तु के अनुरूप बनाया जाए, तो यह न केवल विवाह निर्विघ्न संपन्न कराता है, बल्कि नवदंपति के जीवन में खुशहाली भी लाता है।
आइए जानते हैं कि शादी का कार्ड बनवाते समय किन विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
वास्तु शास्त्र में रंगों का अपना मनोविज्ञान और प्रभाव होता है। शादी के कार्ड के लिए लाल, पीला, केसरिया और क्रीम (Off-white) रंग सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।
कार्ड पर सही प्रतीकों का होना घर में बरकत लाता है।
शायद ही आपको पता हो, लेकिन कार्ड के कोने (Edges) भी आपके भाग्य पर असर डालते हैं।
कार्ड पर लिखे शब्दों का प्रभाव सीधे मेहमानों की मानसिकता पर पड़ता है।
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वास्तु और सनातन परंपरा के अनुसार, कार्ड छपकर आने के बाद सबसे पहली प्रति अपने कुलदेवता या भगवान गणेश को अर्पित करें। ऐसा करने से अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं। इसके बाद ही परिवार के बड़ों और सगे-संबंधियों को न्योता दें।
शादी का कार्ड आपके खुशहाल भविष्य की पहली झलक है। वास्तु के इन छोटे मगर महत्वपूर्ण नियमों का पालन करके आप अपने वैवाहिक जीवन की नींव को और भी मजबूत बना सकते हैं।
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