
धर्म डेस्क। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। इसे न केवल एक पवित्र आभूषण माना जाता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और हेल्थ के लिए यह अत्यंत प्रभावशाली है। रुद्राक्ष की माला से किया गया मंत्र जप सामान्य की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है।
रुद्राक्ष धारण करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह मानसिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ एकाग्रता (Concentration) बढ़ाने में भी सहायक है, इसलिए स्टूडेंट्स के लिए यह बहुत उपयोगी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रुद्राक्ष ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करता है और जातक को बुरी नजर व नेगेटिव एनर्जी से सुरक्षित रखता है। इसके साथ ही यह मन में आने वाले अशुद्ध और बुरे विचारों को कंट्रोल कर जीवन में सफलता के द्वार खोलता है।
रुद्राक्ष को कभी भी सीधे खरीदकर नहीं पहनना चाहिए। सबसे पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करें। इसके बाद शुभ मुहूर्त में 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप कर इसे प्राण-प्रतिष्ठित करें या शिवलिंग से स्पर्श कराकर धारण करें। सावन, सोमवार, अमावस्या या शिवरात्रि इसे धारण करने के लिए सर्वोत्तम दिन माने गए हैं।
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