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दशहरे के दिन 'नीलकंठ' पक्षी का दिखना शुभ क्यों माना जाता है? धार्मिक मान्‍यताओं में बताई गई है वजह

हिंदू परंपरा के अनुसार, दशहरे के दिन एक खास पक्षी को देखना बहुत शुभ माना जाता है। इस पक्षी को 'नीलकंठ' कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यह पक्ष...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 04:44:12 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 04:53:01 PM (IST)
दशहरे के दिन 'नीलकंठ' पक्षी का दिखना शुभ क्यों माना जाता है? धार्मिक मान्‍यताओं में बताई गई है वजह
दशहरे पर नीलकंठ के दर्शन।

HighLights

  1. माना जाता है कि दशहरे पर नीलकंठ पक्षी का दिखना दुर्लभ घटना है।
  2. लेकिन जिन्हें यह दिख जाता है, उनके लिए भविष्य बहुत शुभ होता है।
  3. आइए नीलकंठ पक्षी और दशहरे के बीच के कनेक्शन के बारे में जानें।

धर्म डेस्‍क। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण का पुतला जलाया जाता है। दशहरे के मौके पर रावण का पुतला जलाना (रावण दहन) एक जानी-मानी परंपरा है, लेकिन इस त्योहार से जुड़ी और भी मान्यताएं हैं—जिनमें से एक है 'नीलकंठ' पक्षी का दिखना।

माना जाता है कि दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दिखना एक दुर्लभ घटना है, लेकिन जिन्हें यह दिख जाता है, उनके लिए भविष्य बहुत शुभ होता है। आइए नीलकंठ पक्षी और दशहरे के बीच के कनेक्शन के बारे में जानें।


दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी को देखना शुभ क्यों माना जाता है?

दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दिखना सौभाग्य की निशानी और जीत का प्रतीक माना जाता है। इसके पीछे मुख्य धार्मिक मान्यता इस प्रकार है।

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भगवान श्री राम की रावण पर जीत

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने रावण से युद्ध से पहले नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे। तभी वे रावण को हरा पाए थे।

भगवान शिव का एक रूप

नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतिनिधि या एक रूप माना जाता है। समुद्रमंथन के दौरान जब भगवान शिव ने ज़हर पिया, तो उनका कंठ (गला) नीला हो गया, इसलिए उन्हें 'नीलकंठ' (जिसका मतलब है 'नीले गले वाला') कहा जाता है।

पापों से मुक्ति और सफलता

ऐसा माना जाता है कि दशहरे के दिन इस पक्षी को देखने से साल भर किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को प्रोफेशनल लाइफ में सफलता और तरक्की मिलती है।

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दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण एक ब्राह्मण पिता का बेटा था और ब्राह्मण कुल से था। उसका वध करने के बाद भगवान श्री राम और लक्ष्मण को 'ब्रह्महत्या' (ब्राह्मण की हत्या) का पाप लगा। इस पाप का प्रायश्चित करने और इससे मुक्ति पाने के लिए दोनों भाइयों ने भगवान शिव की पूजा की।

माना जाता है कि इस दौरान भगवान शिव 'नीलकंठ' (नीले गले वाला) के रूप में उनके सामने प्रकट हुए थे। यह भी कहा जाता है कि रावण से युद्ध करने जाने से पहले भगवान राम को नीलकंठ पक्षी के दर्शन हुए थे। नीलकंठ पक्षी को धरती पर भगवान शिव का साक्षात रूप माना जाता है।

माना जाता है कि जो व्यक्ति दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी को देख लेता है, वह मुश्किल समय से बच जाता है और उसे भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है। वैसे तो दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दिखना बहुत शुभ माना जाता है, लेकिन यह पक्षी आसानी से नहीं दिखता। अगर आपको यह पक्षी देखने का सौभाग्य मिले तो आपको इसे प्रणाम करना चाहिए। य

ह मंत्र बोलें: नीलग्रीव शुभग्रीव सर्वकम्फालप्रद। पृथ्वीयामावतिर्नोसि खंजरित नमोस्तु ते॥

अर्थ: हे नीले और शुभ गले वाले पक्षी, आप सभी इच्छाओं को पूरा करने वाले हैं। आप इस धरती पर आए हैं; मैं आपको प्रणाम करता हूँ।