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स्पोर्ट्स डेस्क। न्यूजीलैंड ने दूसरे वनडे में भारत को 7 विकेट से हराकर सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली है। केएल राहुल के शानदार शतक (112) और कप्तान शुभमन गिल की अर्धशतकीय पारी (56) के बावजूद भारतीय टीम 284 रनों का बचाव नहीं कर सकी। मैच के बाद अब सवाल खड़े हो रहे है कि आखिर इस हार से भारतीय टीम को क्या सीखने की जरूरत है। साथ ही लोगों ने हार के लिए कई कारण भी बताए है।
जहां एक ओर मैच के बाद कप्तान गिल ने हार के लिए गेंदबाजों और फील्डर्स को कड़े शब्दों में जिम्मेदार ठहराया। वहीं, कुछ आलोचकों ने इसका जिम्मेदार भारतीय बल्लेबाजी के मिडिल ओवर परफॉर्मेंस को बताया। आइए जानते है इस हार के पांच बड़े कारण, जिस वजह से यह सीरीज एक-एक की बराबरी पर आ गई।
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सबसे पहले चर्चा करते है टीम के कप्तान शुभमन गिल के बयान की। मिडिल ओवर्स में विकेटों का सूखा कप्तान गिल ने सबसे बड़ा कारण बीच के ओवरों में विकेट न मिलना बताया। उन्होंने कहा कि जब 5 फील्डर घेरे के बाहर हों और आप विकेट नहीं लेते, तो रनों की गति रोकना नामुमकिन हो जाता है। डैरिल मिचेल ने इसी का फायदा उठाकर नाबाद 131 रन ठोक दिए।
फील्डिंग में भारी लापरवाही भारत ने पिछले मैच की तरह इस मुकाबले में भी महत्वपूर्ण मौके गंवाए। गिल ने फील्डर्स को लताड़ लगाते हुए कहा कि अगर आप कैच और रन-आउट के मौकों को नहीं भुनाते, तो आपको हार ही मिलेगी। खराब फील्डिंग ने कीवी बल्लेबाजों का काम आसान कर दिया।
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एक और बड़ा कारण माना जा रहा है अर्शदीप सिंह को... बाएं हाथ के गेंदबाज का एंगल, नई गेंद को स्विंग करने की कला और डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर, फिर भी टीम से बाहर। उन्हें बार-बार बेंच पर बैठाना पड़ रहा है। ऐसे में आलोचकों ने सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि यदि चयनकर्ता इसे आगामी वर्ल्ड कप के लिए 'वर्कलोड मैनेजमेंट' या 'रेस्ट' का नाम दे रहे हैं, तो क्या उन्हें ऐसे ही बैठाकर रखा जाएगा?
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रविंद्र जडेजा के अनुभव, खेल की समझ और उनकी असाधारण फील्डिंग पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनके वनडे प्रदर्शन के आंकड़े चिंताजनक रहे हैं। बल्लेबाजी में वह फिनिशर वाली भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं और गेंदबाजी में भी वह धार नजर नहीं आ रही है जो विपक्षी टीम को दबाव में डाल सके। यहां तक कि फील्डिंग में उनका वह 'सिग्नेचर रॉकेट थ्रो', जो कभी निश्चित विकेट की गारंटी होता था, अब पहले जैसा प्रभाव छोड़ने में विफल हो रहा है।
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