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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 07, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Mobile Manufacturing: 30 से ज्यादा तत्वों से बना है आपका मोबाइल, 3 धातुएं तो बेहद दुर्लभ, जानें कैसे है धरती को खतरा

Mobile Manufacturing फिलहाल मौजूद सभी अपडेट फीचर्स वाला अच्छी क्वालिटी का एक मोबाइल फोन कम से कम 30 तत्वों से निर्मित होता है।

By Sandeep ChoureyEdited By: Sandeep Chourey
Publish Date: Wed, 07 Jun 2023 02:46:54 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Jun 2023 11:28:03 AM (IST)
Mobile Manufacturing: 30 से ज्यादा तत्वों से बना है आपका मोबाइल, 3 धातुएं तो बेहद दुर्लभ, जानें कैसे है धरती को खतरा

Mobile Manufacturing: क्या आप जानते हैं कि जिस मोबाइल को आप इस्तेमाल करते हैं, वह 30 तरह की धातुओं से बना है। यूरोपियन कैमिकल सोसायटी (European Chemical Society) की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें भी 3 धातुएं तो बहुत दुर्लभ हैं।

यूरोपियन कैमिकल सोसायटी ने जब धरती से लगातार घट रही धातुओं पर अध्ययन किया तो यह जानकारी सामने आई। समस्या इसलिए विकराल है क्योंकि भारत समेत दुनियाभर में स्मार्टफोन्स का निर्माण धड़ल्ले हो रहा है, लोग जल्दी-जल्दी अपने स्मार्टफोन बदल रहे हैं, पुराने मोबाइल कबाड़ होते जा रहे हैं, और इनके कारण तेज होता खनन धरती को नुकसान पहुंचा रहा है।


मोबाइल निर्माण में इस्तेमाल हुए ये तत्व, देखें पूरी लिस्ट

Oil shale: आइल शेल में मौजूद तत्वों में से एक हाइड्रोजन का उपयोग मोबाइल फोन किया जाता है।

स्पोडुमेन: इसमें मौजूद लिथियम का इस्तेमाल मोबाइल फोन की बैटरी में किया जाता है।

बेरिल : मोबाइल फोन में कनेक्टर्स और तार बनाने के लिए बेरिलियम का उपयोग किया जाता है।

बोरेक्स: बोरॉन का उपयोग मोबाइल फोन में माइक्रोप्रोसेसर और कैमरा चिप में होता है।

डायमंड: हीरा कार्बन का एक रूप है, जो मोबाइल फोन की बैटरी में इलेक्ट्रोड बनाने के लिए उपयोग में आता है।

फ्लोराइट: फ्लोरीन का उपयोग मोबाइल के जरूरी पार्ट्स में किया जाता है।

हैलाइट: इसमें मौजूद सोडियम व क्लोरीन से टच स्क्रीन और केस तैयार होते हैं।

डोलोमाइट: इसमें मौजूद मैग्नीशियम से मोबाइल फोन केस तैयार होते हैं।

डायस्पोर: इससे एल्युमिनियम निकालकर मोबाइल फोन सर्किट बोर्ड तैयार होता है।

क्वार्ट्ज: इसमें मौजूद सिलिका से चिप्स और माइक्रोप्रोसेसर बनते हैं।

एपेटाइट : इससे फास्फोरस निकालकर चिप्स और माइक्रोप्रोसेसर तैयार होते हैं।

सल्फर: सल्फर का उपयोग मोबाइल फोन के सर्किट बोर्ड बनाने में किया जाता है।

ऑर्थोक्लेज़ : टच स्क्रीन ग्लास के लिए इससे पोटेशियम निकाला जाता है।

रूटाइल: इससे मोबाइल बॉडी के निर्माण के लिए टाइटेनियम निकाला जाता है।

क्रोकोइट: क्रोकोइट में पाए जाने वाले तत्व क्रोमियम से मोबाइल फोन केस बनते हैं।

मैंगनाइट : इसमें मौजूद मैंगनीज से मोबाइल फोन बैटरी बनाई जाती है।

Iron meteorite: मोबाइल फोन के स्पीकर और माइक्रोफोन में उपयोग

Cobaltoan spinel: कोबाल्ट का उपयोग मोबाइल फोन की बैटरी में होता है।

Nickeline: निकलिन में निकेल धातु होती है, जो बैटरी निर्माण में काम में आती है।

Copper : मोबाइल फोन में तार और कनेक्टर बनाने के लिए उपयोग

स्पैलेराइट: इसमें मौजूद जिंक, इंडियम व गैलियम का भी मोबाइल पार्ट्स में उपयोग

आर्सेनिक: आर्सेनिक का उपयोग मोबाइल फोन में माइक्रोप्रोसेसर और कैमरा चिप में

ब्रोमार्गाइट: इसमें मौजूद ब्रोमीन से मोबाइल फोन केस निर्माण में मदद

स्ट्रोंटियानाइट: इसमें स्ट्रोंटियम होता है, जो सर्किट बोर्ड बनाने में काम आता है।

Descrespignyite: इसमें yttrium होता है, जिसका उपयोग प्रोसेसर में होता है।

जिरकोन: इसमें मौजूद जिरकोनियम से सर्किट बोर्ड तैयार होता है।

Wulfenite: इसमें मोलिब्डेनम तत्व होता है, जो कनेक्टर्स बनाने के काम में आता है।

चांदी : चांदी का उपयोग मोबाइल फोन के सर्किट बोर्ड में किया जाता है।

ग्रीनोसाइट: इससे कैडमियम मिलता है, जो बैटरी बनाने के लिए उपयोग में आता है।

कैसराइट: इसमें मिलने वाला टिन मोबाइल फोन के सर्किट बोर्ड में इस्तेमाल होता है।

Cassiterite : सर्किट बोर्ड बनाने के लिए इस्तेमाल

बैराइट: इसमें मौजूद बेरियम का उपयोग सर्किट बोर्ड बनाने के लिए होता है।

Columbite-tantalite: इसमें मौजूद टैंटलम से तार और कनेक्टर्स बनते हैं।

टंगस्टन: टंगस्टन का उपयोग स्पीकर और माइक्रोफोन में होता है।

प्लेटिनम: इसका उपयोग भी मोबाइल फोन सर्किट बोर्ड में होता है।

सोना: मोबाइल फोन में कनेक्टर्स और वायर में सोने का इस्तेमाल

सिनेबार: इसमें पारा तत्व होता है, जो सर्किट बोर्ड में उपयोग में आता है।

गैलिना: इसमें लैड होता है, जो सर्किट बोर्ड बनाने में उपयोग होता है।

Bismuth: इससे मोबाइल फोन के तारों और कनेक्टर्स तैयार होते हैं।

लैंथेनाइड: इसमें लैन्थेनम होता है, मोबाइल के रंग और वाइब्रेशन में उपयोग होता है।

ज़िरसिलाइट: इसमें मौजूद सेरियम से टच स्क्रीन ग्लास बनता है।

मोनाजाइट: यह डिस्प्ले कलर्स और मोबाइल फोन की बैटरी में उपयोग आता है।

मोबाइल में इस्तेमाल तत्वों की पूरी लिस्ट

मोबाइल फोन: किस पार्ट में कौन-सी धातु

मोबाइल के कवर, बैटरी, प्रोसेसर आदि के निर्माण में अलग-अलग तत्वों का इस्तेमाल होता है। मोबाइल की सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU), मेमोरी चिप, डिस्प्ले स्क्रीन, टच पैनल, बैटरी, कैमरा, वाई-फाई, ब्लूटूथ, सेंसर, ऑडियो पैनल, रिकॉर्डिंग डिवाइस, कनेक्टर के साथ अलग-अलग पोर्ट आदि डिवाइस के निर्माण के अलग-अलग 30 तत्वों का उपयोग होता है। एक अच्छे मोबाइल फोन में इन तत्वों की संख्या 55 से 60 के बीच भी हो सकती है, लेकिन औसतन एक मोबाइल फोन में 30 तत्वों का इस्तेमाल होता है। यदि इसमें स्क्रीन गार्ड व मोबाइल कवर आदि को भी शामिल कर लिया जाए।

धातु के लिए धरती हो रही छलनी

मोबाइल निर्माण के लिए जरूरी तत्वों की पूरी के लिए धरती में खनन किया जाता है। European Chemical Society की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि yttrium, terbium और dysprosium जैसी कुछ धातुएं तो काफी दुर्लभ हैं, जो आसानी से नहीं मिलती है, जो मोबाइल फोन में शाइनिंग के लिए इस्तेमाल की जाती है। मोबाइल फोन में वायरिंग के लिए तांबा, सोना और चांदी जैसी धातुओं का भी खूब इस्तेमाल किया जाता है। वहीं बैटरी में लिथियम और कोबाल्ट शामिल हैं। इन सभी धातुओं के लिए खनन लगातार होता है। ऐसे में यदि हम बार-बार मोबाइल बदलते हैं तो एक तरह से धरती के विनाश में ही योगदान देते हैं।

यूरोप में 2 साल में मोबाइल बदलता है हर व्यक्ति

European Chemical Society की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में हर व्यक्ति दो साल में अपना मोबाइल बदल देता है। अकेले यूरोपीय संघ की बात की जाए हर महीने करीब 10 मिलियन स्मार्टफोन को हटा दिया जाता है या बदल दिया जाता है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि नए मोबाइल के निर्माण के लिए धरती के कितना खनन कार्य किया जाता होगा।