अविमुक्तेश्वरानंद के वकील का बयान, शंकराचार्य लिखने पर सुप्रीम कोर्ट की कोई रोक नहीं
UP News: माघ मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या पर स्नान से रोके जाने और संतों से कथित मारपीट के विरोध में जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे ह ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 20 Jan 2026 05:07:20 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Jan 2026 05:07:20 PM (IST)
जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे हैंHighLights
- जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे हैं
- अधिवक्ता ने मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट की
- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं
डिजिटल डेस्क। माघ मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या पर स्नान से रोके जाने और संतों से कथित मारपीट के विरोध में जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे हैं। इसी दौरान प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा ‘शंकराचार्य’ लिखने को लेकर जारी नोटिस के जवाब में उनके अधिवक्ता ने मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट की।
मंगलवार को माघ मेला स्थित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के सामने धरनास्थल पर अधिवक्ता पी.एन. मिश्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है, न कि ‘ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य’ लिखने पर।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं
उन्होंने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं और उनके गुरु द्वारा उनके नाम रजिस्टर्ड वसीयत की गई है। इसी आधार पर वह स्वयं को शंकराचार्य लिख रहे हैं।
अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले को अनावश्यक रूप से विवाद का रूप दिया जा रहा है, जबकि कानूनी रूप से शंकराचार्य लिखने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
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स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने विवाद से बनाई दूरी
इस बीच, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा पुरी पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के मौन समर्थन के दावे पर स्वयं स्वामी निश्चलानंद ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, मैं इस मामले में न किसी के पक्ष में हूं और न विपक्ष में। अविमुक्तेश्वरानंद मेरा लाडला है, लेकिन इस विवाद पर मैं कुछ नहीं बोलना चाहता।
उन्होंने मेला प्रशासन के निर्णय को अकाट्य बताया और कहा कि मीडिया व अन्य लोग इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे हैं, जो उचित नहीं है।