कानपुर के ऐतिहासिक मकनपुर मेले की शान बना 11 लाख का घोड़ा, रोजाना खर्च सुनकर उड़ जाएंगे होश
Kanpur historic Makhanpur fair: कानपुर के ऐतिहासिक मकनपुर मेले में इस बार आकर्षण का केंद्र बना है 11 लाख रुपये कीमत का शाही घोड़ा। मेले के उद्घाटन के ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 19 Jan 2026 04:06:42 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Jan 2026 04:06:42 PM (IST)
कानपुर के ऐतिहासिक मकनपुर मेले की शान बना 11 लाख का घोड़ाHighLights
- घोड़े को देखने के लिए उमड़ पड़े
- वसंत पंचमी पर उमड़ती है भीड़
- रोजाना खानपान पर 600 रुपये खर्च
डिजिटल डेस्क। कानपुर के ऐतिहासिक मकनपुर मेले में इस बार आकर्षण का केंद्र बना है 11 लाख रुपये कीमत का शाही घोड़ा। मेले के उद्घाटन के बाद पशु बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है और इसी कड़ी में रविवार को पहुंचे इस खास घोड़े को देखने के लिए दूर-दराज से लोग उमड़ पड़े।
देशभर में मशहूर मकनपुर का पशु मेला उन्नत नस्ल के पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए जाना जाता है। शनिवार को मेले का शुभारंभ होते ही पशु बाजार गुलजार हो उठा।
बाहर से आए व्यापारियों ने घोड़े और खच्चरों के साथ मेले में दस्तक देनी शुरू कर दी है। घोड़ों को देखने के लिए कई संभावित खरीदार मेले में पहुंच चुके हैं और व्यापारियों को उम्मीद है कि इस बार उन्हें अच्छी कीमत मिलेगी।
देखभाल पर रोजाना 600 रुपये खर्च
घोड़ा बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा हरदोई से आए व्यापारी राजेश कुमार के घोड़ों की हो रही है। वह पांच घोड़े लेकर मेले में पहुंचे हैं, जिनमें सबसे महंगे घोड़े की कीमत 11 लाख रुपये आंकी गई है। राजेश कुमार बताते हैं कि इस घोड़े पर अब तक करीब सात लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
हालांकि अभी इसकी बिक्री नहीं की गई है। खास बात यह है कि इस घोड़े के रोजाना खानपान पर ही 500 से 600 रुपये खर्च हो जाते हैं। घोड़ा बाजार में सिर्फ घोड़े ही नहीं, बल्कि उनकी काठी, लगाम, मुश्क और सजावटी सामान की दुकानें भी सज गई हैं। दुकानदारों की मानें तो जैसे-जैसे मेला आगे बढ़ेगा, बिक्री में और तेजी आएगी।
ऊंट और मवेशी हुए कम, बदलते वक्त की तस्वीर
मकनपुर ग्राम प्रधान मजाहिर हुसैन, चांदी भाई, नजीबुल बांकी, धर्मेंद्र सैनी, राजा और फराज बताते हैं कि पहले मेला शुरू होने से एक महीने पहले ही ऊंटों की आमद शुरू हो जाती थी, लेकिन अब बिक्री घटने के कारण ऊंटों का आना लगभग बंद हो गया है। गाय और भैंसों की संख्या भी पहले की तुलना में काफी कम हो गई है।
वसंत पंचमी पर उमड़ती है लोगों की भारी भीड़
ग्राम प्रधान के अनुसार, वसंत पंचमी के अवसर पर मेले में सबसे अधिक भीड़ देखने को मिलती है। आसपास के जिलों के साथ-साथ अन्य प्रदेशों से भी लोग इस मेले में पहुंचते हैं। करीब 600 साल से अधिक पुराने इस ऐतिहासिक मेले का आयोजन इस वर्ष 607वीं बार किया जा रहा है।
मदार साहब की दरगाह पर हर साल दो बार मेला लगता है। एक बार उर्स के दौरान और दूसरी बार वसंत पंचमी पर। वसंत पंचमी के दिन बड़ी संख्या में लोग दरगाह परिसर में छोटे बच्चों का मुंडन संस्कार कराते हैं। यह मेला लगभग एक माह तक चलता है, जहां आसपास के लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों का सामान भी खरीदते हैं।