NRC नंबर खोलेगा राज, काम करने वाले असम के हैं या बांग्लादेशी
उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी लोगों की पहचान को लेकर अब एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। यह पता लगाने के लिए कि ये लोग वास्तव में असम के निवासी हैं या बांग्लादेशी घुसपैठिए, अब एनआरसी (National Register of Citizens) नंबर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Publish Date: Mon, 24 Nov 2025 04:36:49 PM (IST)
Updated Date: Mon, 24 Nov 2025 04:42:57 PM (IST)
NRC नंबर खोलेगा राज, काम करने वाले असम के हैं या बांग्लादेशी।HighLights
- पहचान को लेकर अब एक बड़ा कदम उठाया जा रहा
- असम सरकार एनआरसी पहले ही तैयार कर चुकी है
- पुलिस ने नगर निगम से मांगी पूरी सूची
डिजिटल डेस्कः उत्तर प्रदेश में सफाई कार्य और कूड़ा उठाने का काम करने वाले लोगों की पहचान को लेकर अब एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। यह पता लगाने के लिए कि ये लोग वास्तव में असम के निवासी हैं या बांग्लादेशी घुसपैठिए, अब एनआरसी नंबर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
असम सरकार अपने नागरिकों का राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) पहले ही तैयार कर चुकी है, जिसमें परिवार समेत पूर्वजों तक का विवरण दर्ज है। यही नंबर अब यूपी में संदिग्ध लोगों की पहचान का आधार बनेगा।
लखनऊ में शुरू हुई कड़ी जांच
नगर निगम अभी सभी लोगों के एनआरसी नंबर जुटा नहीं पाया है। इसलिए संदिग्ध व्यक्तियों को थाने बुलाकर उनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पुलिस एनआरसी नंबर के साथ आधार कार्ड का मिलान कर रही है, जिससे कई मामलों की हकीकत तुरंत सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही साफ कह चुके हैं कि अवैध घुसपैठियों को प्रदेश से बाहर किया जाए।
पिछले साल हुए हमले के बाद बढ़ी सतर्कता
इंदिरानगर में पिछले वर्ष कथित बांग्लादेशियों द्वारा नगर निगम अधिकारियों पर हमला किए जाने के बाद मामले ने जोर पकड़ा था। हाल ही में महापौर सुषमा खर्कवाल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और कथित बांग्लादेशी बस्तियों को खाली कराने की कार्रवाई भी कराई। इसके साथ ही मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए जांच अभियान तेज कर दिया गया है।
कई लोगों ने खुद को असम निवासी बताते हुए पहचान पत्र और आधार कार्ड प्रस्तुत किए। अलीगंज और गोमतीनगर में ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा मिली है जबकि जानकीपुरम में कई खाली भूखंडों पर कथित बांग्लादेशियों की अस्थाई बस्तियां बनी हुई हैं।
पूर्व डीजीपी बृजलाल ने जताई थी चिंता
भाजपा के राज्यसभा सदस्य और पूर्व डीजीपी बृजलाल ने भी लखनऊ में कथित बांग्लादेशियों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि बड़ी संख्या में ये लोग सफाई कार्य के लिए लखनऊ में आकर बस गए हैं और नगर निगम तथा पुलिस की लापरवाही के कारण इनका नेटवर्क बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि गोमतीनगर विस्तार क्षेत्र में कई सफाईकर्मी खुद को असम के बोंगाई, नलबाड़ी, बरपेटा और नौगांव का निवासी बताते हैं, लेकिन उनके रिकॉर्ड देखने पर वे बांग्लादेशी साबित होते हैं।
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पुलिस ने नगर निगम से मांगी पूरी सूची
शहर के सभी थानों की पुलिस ने नगर निगम से सफाईकर्मियों की पूरी सूची, उनके एनआरसी नंबर और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। नगर निगम अब संबंधित सभी सूचनाएं एकत्र कर पुलिस के पास भेज रहा है, ताकि संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान और उनकी वैधता की जांच जल्द पूरी की जा सके।