
डिजिटल डेस्क। ईरान में आर्थिक बदहाली और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच भड़की हिंसा ने अब एक भयावह मोड़ ले लिया है। देश में जारी अशांति को लेकर ईरानी अधिकारियों ने पहली बार स्वीकार किया है कि अब तक की झड़पों में सुरक्षाकर्मियों समेत लगभग 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से मौजूदा शासन के लिए इसे अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती माना जा रहा है।
रॉयटर्स से बातचीत में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने मौतों के पीछे 'आतंकवादी समूहों' का हाथ बताया है। सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की आड़ में छिपे कुछ तत्वों ने ही सुरक्षाबलों और आम नागरिकों, दोनों पर हमले किए हैं। हालांकि, ईरान ने मारे गए लोगों की सूची या विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया है।
ईरानी नेतृत्व ने इस पूरी अशांति के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। अधिकारियों का आरोप है कि पिछले साल हुए इजरायली और अमेरिकी हमलों के बाद से ही ये देश ईरान को अस्थिर करने के लिए 'अज्ञात समूहों' के जरिए प्रदर्शनों को हाईजैक कर रहे हैं।
आर्थिक तंगी से उपजे इस जनाक्रोश को लेकर ईरान के धार्मिक अधिकारियों ने एक 'डबल गेम' खेलने की कोशिश की है:
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ईरान में संचार के साधनों पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया है। देश के कई हिस्सों में इंटरनेट पूरी तरह बंद है, जिससे न केवल सूचनाओं का प्रवाह रुक गया है, बल्कि बाहरी दुनिया को हकीकत का पता चलने में भी भारी बाधा आ रही है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मरने वालों और गिरफ्तार होने वालों का वास्तविक आंकड़ा सरकारी रिपोर्ट से कहीं अधिक हो सकता है।
(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)