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डिजिटल डेस्क। मध्य पूर्व में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे हो गए हैं। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों और वहां की सरकार द्वारा की जा रही दमनकारी कार्रवाई के बीच अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। ईरान वर्तमान में अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रहा है, जहां सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 2500 से अधिक प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका ईरानी जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि, कुछ रक्षा विशेषज्ञों का तर्क है कि अमेरिका का सीधा हमला ईरानी सरकार के लिए 'राष्ट्रवाद' का कार्ड खेलने का मौका दे देगा, जिससे घरेलू विद्रोह कमजोर पड़ सकता है। फिलहाल, वाशिंगटन और तेहरान के बीच जुबानी जंग ने सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा दी है।
अमेरिका ने ईरान को चारों तरफ से घेर रखा है। ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकाने किसी भी समय हमले के लिए तैयार हैं। हालांकि, इन ठिकानों पर जवाबी हमले का खतरा भी बना रहता है। पिछले साल ईरान ने कतर के अल उदैद एयरबेस पर हमला कर अपनी मंशा जाहिर कर दी थी, जिसके बाद सर्वोच्च नेता खामेनेई के सलाहकारों ने अमेरिका को 'कड़ी जवाबी कार्रवाई' की चेतावनी दी है।
1. हवाई हमला (B-2 बॉम्बर): मध्य पूर्व के अड्डों से B-2 स्टेल्थ बॉम्बर और फाइटर जेट्स के जरिए ईरान के रडार और सैन्य ठिकानों को धुआं-धुआं करना।
2. समुद्र से मिसाइल प्रहार: खाड़ी में मौजूद अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और पनडुब्बियों से क्रूज मिसाइलों की बौछार करना।
3. प्रिसिजन ड्रोन अटैक: सशस्त्र ड्रोन्स के जरिए ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष नेतृत्व और यूनिट्स को सटीक निशाना बनाना।
4. साइबर युद्ध (Stuxnet जैसा हमला): ईरान के सैन्य कमांड, संचार नेटवर्क और पावर ग्रिड को डिजिटल हमलों से ठप कर देना।
5. स्पेशल फोर्स ऑपरेशंस: अमेरिकी सील्स या डेल्टा फोर्स द्वारा गुप्त रूप से ईरानी सीमा में घुसकर रणनीतिक ठिकानों पर तोड़फोड़ करना।
6. लंबी दूरी की मिसाइलें: अमेरिका से ही इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइलों या लंबी दूरी के हथियारों से ईरान के परमाणु ठिकानों को सीमित लक्ष्य बनाना।