
डिजिटल डेस्क। पाकिस्तान में इस समय एक लेख को लेकर 'जेन-जी' (Gen-Z) का गुस्सा उबाल पर है। अमेरिका में पीएचडी कर रहे पाकिस्तानी छात्र जोरैन निजामानी द्वारा लिखा गया लेख, जिसका शीर्षक 'सबकुछ खत्म हुआ' था। बाद में सेना के दबाव की वजह से इसे हटा दिया गया। इस घटना ने पाकिस्तान की युवा पीढ़ी और सत्ता के बीच की गहरी खाई को उजागर कर दिया है।
अमेरिका में पीएचडी करने वाले पाकिस्तानी छात्र जोरैन निजामानी ने पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' में 1 जनवरी को 'सबकुछ खत्म हुआ' टाइटल से एक लेख छपवाया था। अर्कांसस विश्वविद्यालय से क्रिमिनोलॉजी की पढ़ाई कर रहे जोरैन ने अपने लेख में सत्तासीन उम्रदराज नेताओं और सेना पर कड़ा प्रहार किया।
उन्होंने लिखा, "पाकिस्तान में जो भी उम्रदराज लोग सत्ता में हैं, उनका खेल खत्म हो चुका है। युवा पीढ़ी आपके झांसे में नहीं आ रही है। आप स्कूल और कॉलेजों में कितने भी सेमिनार कर लें, लेकिन आप युवाओं में देशभक्ति की भावना नहीं जगा सकते हैं।"
उन्होंने आगे लिखा, ''समान अवसर, मजबूत बुनियादी ढांचा और कुशल तंत्र होने पर देशभक्ति अपने आप आ जाती है। जब आप अपने लोगों की बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखेंगे, लोगों के अधिकार सुनिश्चित करेंगे, तो आपको स्कूल-कॉलेज में जाकर स्टूडेंट्स को बताना नहीं पड़ेगा कि आप अपने देश से प्यार करें।"
लेख को ऑनलाइन हटाए जाने के बाद पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल उठने लगे हैं। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे 'सच्चाई को दबाने की कोशिश' करार दिया है।
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पूर्व पीएम मूनिस इलाही ने इसे नीति निर्माण करने वाली पीढ़ी के लिए एक रिएलिटी चेक बताया। मानवाधिकार आयोग ने लेख हटाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है। इसके अलावा एक्टिविस्ट और वकीलों ने इसे हर पाकिस्तानी युवा के दिल की आवाज बताया है।