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पॉक्सो के बढ़ते मामलों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जताई चिंता, तीनों खंडपीठों में 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित, सरकार से पूछा सवाल

प्रदेश में पॉक्सो के बढ़ते मामलों और लंबित अपीलों को लेकर हाई कोर्ट की चिंता के बाद अब सवाल राज्य सरकार की जागरूकता व्यवस्था पर है।

By Digital DeskEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Tue, 06 Oct 2026 08:33:24 AM (IST)Updated Date: Tue, 06 Oct 2026 08:46:43 AM (IST)
पॉक्सो के बढ़ते मामलों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जताई चिंता, तीनों खंडपीठों में 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित, सरकार से पूछा सवाल
पॉक्सो के बढ़ते मामलों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जताई चिंता, फाइल फोटो

HighLights

  1. पॉक्सो मामलों को लेकर हाई कोर्ट की चिंता
  2. जागरूकता को लेकर सरकार से पूछा सवाल
  3. हाई कोर्ट में 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। प्रदेश में पॉक्सो के बढ़ते मामलों और लंबित अपीलों को लेकर हाई कोर्ट की चिंता के बाद अब सवाल राज्य सरकार की जागरूकता व्यवस्था पर है। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य आया है कि बड़ी संख्या में पीड़िता 16 से 18 वर्ष तथा आरोपित 19 से 22 वर्ष आयु वर्ग के हैं।

ऐसे में सवाल यह है कि क्या सरकार की जागरूकता व्यवस्था इन आयु वर्गों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है या अभियान अभी भी सामान्य जागरूकता तक सीमित हैं।

दरअसल, हाई कोर्ट ने पॉक्सो मामलों में जागरूकता के अभाव को महत्वपूर्ण पहलू माना है और केंद्र व राज्य सरकार को युवाओं को कानून के प्रावधानों और उसके संभावित दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की जरूरत बताई है।

न्यायालय के समक्ष राज्य की ओर से प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों का विवरण भी रखा गया है। राज्य स्तर पर करीब 52 हजार व जिला स्तर पर 2.73 लाख से अधिक प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिए जाने और आवाज संस्था के माध्यम से करीब 4.50 लाख लोगों तक पहुंच की जानकारी दी गई है।


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मामलों की स्थिति को लेकर उठाया मुद्दा

इसके बावजूद कोर्ट ने मामलों की स्थिति को देखते हुए जागरूकता के प्रभावी क्रियान्वयन का मुद्दा उठाया है। कोई समन्वित और दीर्घकालिक जागरूकता योजना है या नहीं अब पड़ताल का विषय यह है कि विधि विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा विभाग के पास पॉक्सो को लेकर कोई समन्वित और दीर्घकालिक जागरूकता योजना है या नहीं।

क्या स्कूल-कॉलेजों में किशोर-किशोरियों के लिए नियमित कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं? क्या 16 से 18 वर्ष और 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के लिए अलग जागरूकता सामग्री तैयार की गई है। क्या युवाओं को यह बताया जा रहा है कि 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति की सहमति पॉक्सो कानून के तहत वैधानिक सहमति नहीं मानी जाती।

इस पड़ताल में पुलिस मुख्यालय से पिछले पांच वर्षों में दर्ज पॉक्सो मामलों के आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे। इनमें कुल प्रकरणों के साथ पीड़ित और आरोपितों की आयु, जिलावार स्थिति, चालान, दोषसिद्धि और लंबित मामलों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है। इससे यह पता चल सकेगा कि मामलों में वृद्धि किन आयु वर्गों और क्षेत्रों में अधिक है।

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14,531 आपराधिक अपीलें लंबित

हाई कोर्ट के समक्ष प्रदेश की तीनों खंडपीठों में पॉक्सो से जुड़ी 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित होने का आंकड़ा सामने आ चुका है। ऐसे में चुनौती केवल मामलों के निपटारे की नहीं, बल्कि यह समझने की भी है कि अपराध की रोकथाम के लिए सरकार की मौजूदा जागरूकता व्यवस्था कितनी लक्षित और प्रभावी है।

हाई कोर्ट की चिंता ने इस सवाल को अब सार्वजनिक नीति और सरकारी जवाबदेही के केंद्र में ला दिया है। सरकार की अधिकतर योजनाओं के केंद्र में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं। वहीं, 16 से 18 वर्ष की किशोरियों और 18 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं को लेकर कोई समग्र योजना दिखाई नहीं देती।

इस आयु वर्ग से संबंधित आंकड़े उपलब्ध हैं, लेकिन उनका समुचित विश्लेषण नहीं किया गया है। नीति निर्माण के लिए केवल आंकड़े जुटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि इस आयु वर्ग के सामने कौन-कौन सी सामाजिक, शैक्षणिक, मानसिक और रोजगार संबंधी चुनौतियां हैं। अमिताभ गुप्ता, जनहित याचिकाकर्ता।

इस कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देना है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केवल मुकदमे दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। किशोरों, अभिभावकों और स्कूलों के स्तर पर कानून की स्पष्ट जानकारी पहुंचाना और रोकथाम पर जोर देना जरूरी है। असीम त्रिवेदी, विधिवेत्ता।

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