नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेशभर में बहुचर्चित और शहर के पॉश क्षेत्र चेतकपुरी रोड के किनारे कॉलोनी बसाने के मामले में ग्वालियर के अफसरों और बिल्डरों के कारनामे पर अब शासन ने भी मुहर लगा दी है। चेतकपुरी नाले को ग्वालियर के मास्टर प्लान 2035 से ही गायब कर दिया गया।
गत मई माह में नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय दुबे ग्वालियर दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने चेतकपुरी स्थित नाले के आसपास कॉलोनी कटती देखीं, साथ ही नाले का प्रवाह क्षेत्र भी बदला जा रहा था।
इसको देखते हुए उन्होंने सख्त टिप्पणी की और सारी फाइलें तलब कर ली थीं। इस मामले को लेकर लोकायुक्त और न्यायालय में भी प्रकरण विचाराधीन हैं। इसके बाद दो जुलाई को उन्होंने संयुक्त संचालक टीएंडसीपी केएस गवली को भोपाल तलब कर मास्टर प्लान की जानकारी मांगी थी।
संयुक्त संचालक ने उन्हें बताया था कि मास्टर प्लान 2005 के रंगीन मानचित्र पर यह जलस्रोत अंकित नहीं था, लेकिन पैनल मानचित्र में दर्ज था। मास्टर प्लान 2021 के रंगीन नक्शे में यह जलप्रवाह स्रोत अंकित था, लेकिन मास्टर प्लान 2035 के नक्शे से इसे हटा दिया गया।
इसके बाद अब नगरीय प्रशासन विभाग की अवर सचिव सुप्रिया पेंडके द्वारा आयुक्त संचालक संचालक टीएंडसीपी को निर्देश दिए गए हैं कि ग्वालियर के मास्टर प्लान 2021 के आधार पर चेतकपुरी नाले अथवा जलप्रवाह स्रोत को मास्टर प्लान 2035 के पैनल मानचित्र पर यथावत अंकित किया जाए।
इस नाले के रेखांकन क्षेत्र में भविष्य में कोई भी विकास अनुज्ञा जारी न की जाए। इसके अलावा जिला कार्यालय द्वारा इस क्षेत्र में जारी की गईं त्रुटिपूर्ण विकास अनुज्ञाओं को निरस्त करने के लिए विभाग में प्रस्ताव भेजा जाए।
विभाग ने मास्टर प्लान 2035 से नाले को हटाने में संलिप्त गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध जांच कर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव एक माह के भीतर शासन को प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
ये विकास अनुज्ञाएं हुई थीं जारी
चेतकपुरी जलस्रोत के आसपास पिछले कुछ वर्षों में छह विकास अनुज्ञाएं जारी हुई हैं, जिनके आधार पर नगर निगम ने भी प्लाटिंग और निर्माण की अनुमतियां जारी की हैं।
इनमें विद्युत गृह निर्माण समिति के सुरेंद्र सिंह भदौरिया के नाम पर तीन विकास अनुज्ञा, दीपक सचेती के नाम पर एक विकास अनुज्ञा, परिकल्प रियलिटी के राकेश शर्मा के नाम पर एक और अर्जुन कपूर के नाम पर एक विकास अनुज्ञा जारी की गई थी।