
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जिला अस्पताल मुरार में शनिवार को करीब छह घंटे बिजली गुल रहने से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। बिजली आपूर्ति बाधित होने का सबसे ज्यादा असर ऑपरेशन, जांच और ब्लड बैंक पर पड़ा।
नेत्र और सर्जरी विभाग में ऑपरेशन के लिए चिन्हित सात मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़े। इनमें नेत्र विभाग में चार और सर्जरी विभाग के तीन मरीज शामिल हैं। वहीं एक्स-रे और सीटी जांच भी घंटों बंद रही। जांच के लिए इंतजार कर रहे कई मरीज बिजली नहीं आने पर बिना जांच कराए ही वापस लौट गए।
बिना बिजली मरीज रहे परेशान
जनरेटर से सीटी जांच के लिए बिजली सप्लाई शुरू की गई, इसके बाद जांच हो सकीं। बिजली गुल होने के दौरान अस्पताल के ओपीडी हिस्से में जनरेटर से आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन अस्पताल के अन्य हिस्सों में बिजली नहीं होने से मरीज और उनके स्वजन परेशान होते रहे।
आर्थोपेडिक विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल नजर आए। पंखे और कूलर बंद होने के कारण स्वजन हाथ के पंखे से मरीजों को हवा करते दिखाई दिए। ऑपरेशन के बाद मरीजों को इस वार्ड में शिफ्ट किया जाता है ऐसे में संक्रमण का खतरा बना रहा।
ब्लड बैंक में तापमान नियंत्रण बिगड़ा
बिजली गुल होने से ब्लड बैंक में भी तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था प्रभावित हुई। ब्लड खराब होने की आशंका को देखते हुए ब्लड बैंक प्रभारी ने अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया।
इसके बाद ब्लड बैंक के लिए आरएमओ डॉक्टर जेपीएन शर्मा, सहायक प्रबंधक डॉक्टर राजेश बिरथरिया ने जनरेटर से अस्थायी बिजली व्यवस्था कराई। हालांकि, इस दौरान रक्त लेने पहुंचे मरीजों के स्वजन को भी इंतजार करना पड़ा।
रोजाना 150 एक्स-रे, छह घंटे बाद शुरू हुई जांच
अस्पताल में ओपीडी के दौरान रोजाना करीब 150 एक्स-रे किए जाते हैं। शनिवार को बिजली गुल रहने के कारण एक्स-रे जांच करीब छह घंटे प्रभावित रही। बिजली बहाल होने के बाद ही एक्स-रे सहित अन्य जांच दोबारा शुरू हो सकीं।
बिजली जैसी बुनियादी सुविधा बाधित होने से एक साथ कई विभागों की सेवाएं प्रभावित होने से अस्पताल की वैकल्पिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए।
लक्ष्मण सिंह, स्वजन
वार्ड में पंखे बंद होने से गर्मी बहुत ज्यादा थी। मरीज की हालत देखकर हाथ से पंखा करना पड़ा। अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए कम से कम बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए।
गौरव सिंह, मरीज
सुबह से बिजली नहीं है। वार्ड में गर्मी बहुत है। इसलिए बाहर बैठा हूं। अस्पताल प्रबंधन को वैकल्पिक व्यवस्था करना चाहिए। इतना ही नहीं शौचालय में पानी भी नहीं है। साथ ही गंदगी भी है।
ओपीडी में जनरेटर से बिजली सप्लाई हो रही थी। जहां जनरेटर से बिजली सप्लाई नहीं हो रही थी वहां वैकल्पिक व्यवस्था कराई गई। ब्लड बैंक में भी अलग से सप्लाई दी गई। डॉक्टर जेपीएन शर्मा, आरएमओ, जिला अस्पताल मुरार
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