नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। हजार बिस्तर अस्पताल में आग लगने की स्थिति में मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बने अस्पताल भवन के फायर हाइड्रेंट सिस्टम के जरूरी उपकरण ही गायब हैं।
अस्पताल में एक साथ करीब 200 मरीज भर्ती रहते हैं। इनमें गंभीर मरीज, बुजुर्ग और ऐसे मरीज भी शामिल होते हैं, जो खुद चलकर सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंच सकते। आग लगने की स्थिति में इन्हें वार्ड से निकालना और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना अपने आप में बड़ी चुनौती होगी।
ऐसे में आग पर शुरुआती स्तर पर काबू पाने के लिए लगाए गए फायर फाइटिंग सिस्टम का हर उपकरण अपनी जगह पर और उपयोग योग्य होना जरूरी है।
भवन सुपुर्दगी के बाद से चोरी का सिलसिला शुरू
अस्पताल को हैंडओवर किए जाने के बाद से ही परिसर में लगे उपकरणों के चोरी होने का सिलसिला शुरू हो गया था। इसके बावजूद फायर सेफ्टी सिस्टम के सभी उपकरणों की नियमित निगरानी और भौतिक सत्यापन कितना प्रभावी रहा, यह सवाल अब सामने है।
फायर सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा इंतजाम में उपकरण गायब होने का पता ट्रायल के दौरान चलना व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है।
अब खरीदी के लिए भेजा प्रस्ताव
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि चोरी हुए फायर हाइड्रेंट उपकरणों की दोबारा खरीदी के लिए प्रस्ताव तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को भेज दिया गया है। उपकरण मिलने के बाद सिस्टम को दोबारा पूरी तरह उपयोग योग्य बनाया जाएगा।
हालांकि, सवाल यह है कि नए उपकरण लगने तक अस्पताल में आग से बचाव की व्यवस्था कितनी प्रभावी रहेगी।
फायर सेफ्टी में एक भी कमी पड़ सकती है भारी
आग लगने के शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान उपलब्ध फायर हाइड्रेंट, होज रील, नोजल और अन्य उपकरणों के माध्यम से आग को फैलने से रोकने का प्रयास किया जाता है। हजार बिस्तर जैसे बड़े अस्पताल में मरीजों की संख्या और उनकी स्थिति को देखते हुए फायर सेफ्टी सिस्टम में किसी भी तरह की कमी का जोखिम बढ़ जाता है।
आग की इन घटनाओं ने झकझोरा, फिर भी उदासीन रहे जिम्मेदार
अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। खासकर एनआईसीयू, आईसीयू और गायनिक वार्ड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आग लगने पर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बन जाता है। देशभर में हुई आग लगने की कुछ घटनाओं ने लोगों को झकझोर कर रख दिया, इसके बाद भी ग्वालियर में जिम्मेदार उदासीन रहे।
छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के एनआईसीयू में 22 अगस्त 2026 की रात शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। उस समय यूनिट में कुल 33 नवजात भर्ती थे। आग की चपेट में आने से कुछ नवजात झुलस गए थे।
इसी तरह वर्ष 2025 में एक निजी अस्पताल में आग लगने की घटना में 10 लोगों की मौत हो गई थी।
ग्वालियर जेएएच के कमलाराराजा अस्पताल के गायनिक आईसीयू में मार्च 2025 में आग लगने की घटना भी सामने आ चुकी है। आग के बाद सुरक्षा को देखते हुए 190 से अधिक महिला मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा था।
जेएएच के ट्रामा सेंटर में भी आग लगने की घटना हो चुकी है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत होने की बात कही गई थी, हालांकि उसे अस्पताल प्रबंधन ने नकार दिया था।
हां, फायर हाइड्रेंट सिस्टम के उपकरण चोरी हुए हैं। इनकी खरीदी के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजा जा चुका है। प्रस्ताव मंजूरी के बाद उपकरण खरीदी की जाएगी। डॉक्टर सुधीर सक्सेना, अधीक्षक, जेएएच।