.webp)
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से बीमार होने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा सर्वेक्षण किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि अब तक 26 हजार से अधिक घरों का सर्वे किया जा चुका है। जबकि वास्तविकता यह है कि भागीरथपुरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र से 200 मीटर की दूरी पर चावला जी की गली में सर्वे टीम अब तक नहीं पहुंची है। यहां बीमार लोग अभी भी किसी स्वास्थ्यकर्मी के आने का इंतजार कर रहे हैं।
केंद्र और राज्य सरकार के तहत लगभग सात टीमें क्षेत्र में कार्यरत हैं, लेकिन चावला जी की गली में न तो सर्वे के लिए कोई टीम आई है और न ही पानी का सैंपल लेने के लिए। इस गली में 16 परिवार निवास करते हैं, जिनमें से 20 से अधिक लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित हो चुके हैं। वर्तमान में दो मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि एक हाल ही में डिस्चार्ज होकर घर लौटा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम का कोई भी सदस्य यहां नहीं आया है।
नेहा, जो चार दिनों से एलआईजी क्षेत्र के एक निजी क्लीनिक में भर्ती हैं, ने बताया कि उनके घर पर कोई स्वास्थ्यकर्मी नहीं आया। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिन घरों में मरीज मिले हैं, उनके आसपास के 50 घरों का सर्वे किया जा रहा है। ललिता कौशल, जो दो दिन पहले अस्पताल से लौटीं, ने भी फॉलोअप न होने की शिकायत की है।
गुरुवार से मलेरिया विभाग की टीम भागीरथपुरा में सर्वेक्षण करेगी। 40 सदस्यों की यह टीम गंदगी वाले स्थानों पर लार्वा नष्ट करने की दवाई का छिड़काव करेगी और डेंगू-मलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता फैलाएगी। यह पहली बार है जब मरीज मिलने पर भी टीम दवाईयों का छिड़काव करेगी।
यह भी पढ़ें- दूषित पानी कांड के 10 दिन बाद भी संकट बरकरार, भागीरथपुरा में पानी की टेस्टिंग फेल, अब भी टैंकरों के भरोसे चल रहा काम