नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। आमतौर पर मैदानी क्षेत्रों में आम के कलमी पौधे बरसात में ग्राफ्टिंग कर तैयार किए जाते हैं, लेकिन जब पूरे देश में भीषण गर्मी पड़ रही हो और तापक्रम 42 से 46 डिग्री के बीच चला जाता हो। जनजीवन के साथ-साथ पशु-पक्षी भी भीषण गर्मी में परेशान हो तो ऐसी परिस्थिति में आम के पौधे तैयार करना बड़ी चुनौती होती है, लेकिन इस काम में खंडवा की बोरगांव खुर्द स्थित शासकीय उद्यान नर्सरी को बड़ी सफलता मिली है।
बोरगांव खुर्द की नर्सरी में नई तकनीक से ग्राफ्टिंग के जरिए कलमी आम की आम्रपाली, मल्लिका, चौसा, दशहरी एवं लंगड़ा जैसी किस्मों के पौधों को सफलता पूर्वक तैयार किया है। यह नवाचार उद्यान विकास अधिकारी टीके पवार ने रोपणी के माली फूल सिंह चौहान के सहयोग से कर दिखाया है।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के खंडवा अंचल भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है। जब अप्रैल-मई माह में खंडवा का तापमान 42 से 46 डिग्री के बीच होता है, तब उद्यान नर्सरी में कलमी आम के पौधे ग्राफ्टिंग विधि तैयार करना शुरू किया जाता है।
उद्यान प्रभारी टीके पवार ने बताया कि इस नर्सरी में भीषण गर्मी के दौरान आम के पौधे बीते 5 साल से तैयार किए जा रहे हैं। हर साल यहां 4 से 5 हजार पौधों की ग्राफ्टिंग की जाती है, जिसमें 80 से 85 फीसदी पौधे सफलतापूर्वक तैयार हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी में तैयार किए गए पौधों में कीट और रोग का प्रकोप नहीं होता है। तापमान का विशेष ध्यान रखा जाए तो पौधे तेजी से विकसित होते हैं।
कलमी आम के पौधे तैयार करने में कोई विशेष उपकरण, यंत्र या सामग्री की जरूरत नहीं होती है। उद्यान प्रभारी टीके पवार ने बताया कि नर्सरी में वर्मी यूनिट के 4 पक्के पिट्स बनाए गए हैं। इसमें गोबर और कचरा भर दिया जाता है। पिट्स को हरी नेट से ढक दिया जाता है और माइक्रो स्प्रिंकलर लगाकर पानी का छिड़काव किया जाता है। वर्मी पिट्स में कचरा जब ठंडा हो जाता है तो उसमें केंचुए छोड़ दिए जाते हैं, जो वर्मी कम्पोस्ट तैयार करते हैं। आम की ग्राफ्टिंग करके वर्मी यूनिट में रख दिया जाता है। कलमी आम की सायन में 12 से 15 दिन में पतियों आने लगती है। एक से डेढ़ माह में आम के पौधे पौधे तैयार हो जाते हैं। भीषण गर्मी में आम के पौधे तैयार करना एक बड़ी चुनौती है और इसे एक नवाचार माना जा रहा है।