
नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। गांधी पेट्रोल पंप पर अतिक्रमण हटाने के लिए नगर पालिका की टीम आज हिटाची मशीन लेकर पहुंची थी। कार्रवाई शुरू होते ही नपाध्यक्ष खुद मौके पर पहुंचीं। इसी दौरान नगर पालिका के ही कर्मचारियों ने हिटाची मशीन के आगे आकर कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया।
कर्मचारियों के विरोध के चलते पूरी कार्रवाई बीच में ही थम गई। मौके पर मौजूद लोगों ने नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का कहना था कि चुनिंदा जगहों पर ही कार्रवाई की जा रही है।
नपाध्यक्ष ने दी धरने की चेतावनी
हंगामे के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और सड़क पर लंबा जाम लग गया। जाम के कारण राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं नगर पालिका अध्यक्ष ने प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए धरने पर बैठने की चेतावनी दे दी।
उन्होंने कहा कि अगर नियमानुसार कार्रवाई नहीं होने दी गई तो वे वहीं धरने पर बैठेंगी। आश्चर्य की बात यह रही कि हंगामा और जाम की सूचना के बाद भी काफी देर तक मौके पर पुलिस नहीं पहुंची, जिससे स्थिति और बिगड़ती गई।
क्यों उलझा है पजेशन ?
दरअसल, नगर पालिका की बेशकीमती 13,600 वर्ग फीट जमीन पर 42 साल से चला आ रहा कब्जे का केस नपा जीत गई है, लेकिन जीत के बाद भी जमीन पर कब्जा नहीं ले पा रही है।
कारण है नगर पालिका के अपने ही अफसरों की चूक। अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने सीएमओ यशवंत राठौर पर सीधा आरोप लगाया है कि जानबूझकर 10 दिन का गलत नोटिस देकर पेट्रोल पंप संचालक को सुप्रीम कोर्ट से स्टे लाने का समय दिया जा रहा है।
नपा और प्रशासन आमने-सामने
खास बात यह है कि 4 अक्टूबर को पेट्रोल पंप की भूमि पर पजेशन की कार्रवाई के संबंध में नपाध्यक्ष ने मीडिया के समक्ष नपा सीएमओ यशवंत राठौर व कलेक्टर अर्पित वर्मा को दो-दो बार फोन लगाए लेकिन उन्होंने फोन अटेंड नहीं किए। नपाध्यक्ष के अनुसार दोनों सुबह से मेरा फोन नहीं उठा रहे हैं।
इस संबंध में गांधी पैट्रोल पंप के संचालक समीर गांधी का कहना है कि, इस मामले में हमने कानून का पालन किया है, नपा को भी कानून का पालन करना चाहिए। उनके अनुसार मामला न्यायालय में है, ऐसे में मैं इस विषय में कुछ ज्यादा नहीं कहूंगा।
यह है पूरा मामला
झांसी तिराहा स्थित गांधी पेट्रोल पंप की यह जमीन 23 जुलाई 1960 को भारत पेट्रोलियम के लिए मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स को 25 साल के लिए लीज पर दी गई थी।
प्रीमियम 4,472 रुपये और सालाना, किराया 279.50 रुपये तय था। 1984 में लीज खत्म हो गई। लीज रिन्यू नहीं हुई। तब से नपा कोर्ट में लड़ रही है। इस दौरान न तो लीज का पैसा आया, न किराए का। अध्यक्ष के अनुसार यही बकाया अब करीब 2 करोड़ हो गया है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट खंडपीठ ग्वालियर ने द्वितीय अपील 18/2003 में 01/09/2026 को फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ नवीनीकरण का आवेदन देने या कुछ राशि जमा करने से लीज स्वतः नवीनीकृत नहीं होती। संचालक ने जमीन को अवैध रूप से सुधीर ऑटोमोबाइल्स और अन्य को सब-लीज पर दे दिया था। नपा की अपील स्वीकार कर निचली अदालतों के फैसले पलट दिए गए।
फैसले के बाद यह हुआ
हाईकोर्ट के आदेश के बाद नपा ने 22 सितंबर 2026 को पत्र क्रमांक 5073/2026 से अंतिम सूचना पत्र जारी किया। इसमें 10 दिन में स्वेच्छा से कब्जा छोड़ने को कहा गया। अवधि 2 अक्टूबर को खत्म हो गई।