उमरिया में रेफर के कुछ देर बाद हुई प्रसव पीड़ा, एंबुलेंस में करानी पड़ी डिलीवरी, सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग
जिला अस्पताल से देर रात शहडोल रेफर की गई प्रसूता ने रास्ते में एम्बुलेंस के भीतर ही बेटे को जन्म दे दिया।
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 12:24:05 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 12:29:17 PM (IST)
एंबुलेंस में करानी पड़ी महिला की डिलीवरी, नईदुनियाHighLights
- सवालों के घेरे में उमरिया स्वास्थ्य विभाग
- रेफर के कुछ देर बाद हुई प्रसव पीड़ा
- एंबुलेंस में करानी पड़ी महिला की डिलीवरी
नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। जिला अस्पताल से देर रात शहडोल रेफर की गई प्रसूता ने रास्ते में एम्बुलेंस के भीतर ही बेटे को जन्म दे दिया। अमहा के करीब हाईवे पर अचानक प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद एम्बुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव कराया गया।
इस दौरान इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन पुष्पराज यादव और पायलट शिवम यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए जच्चा-बच्चा को सुरक्षित तरीके से करकेली अस्पताल पहुंचाया, जहां देर रात दोनों को भर्ती कराया गया।
एक दिन पहले कराया था भर्ती
मुख्यालय से सटे ग्राम महिमार निवासी 31 वर्षीय प्रेम बाई पति मोती कोल को एक दिन पहले असहनीय प्रसव पीड़ा के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
बताया जा रहा है कि, प्रसूता का पूर्व में नसबंदी का ऑपरेशन भी हो चुका था, बावजूद इसके यह उसकी पांचवीं डिलीवरी थी। पूर्व में जन्मे एक पुत्र की मृत्यु भी हो चुकी है। अस्पताल में प्रसूता की स्थिति एब्नॉर्मल प्रेजेंटेशन बताई गई, जिसके बाद देर रात करीब एक बजे उसे शहडोल रेफर कर दिया गया।
हालांकि, रेफरल के कुछ ही देर बाद रास्ते में एम्बुलेंस के भीतर प्रसव हो जाना अब स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।
- जब प्रसूता प्रसव के इतने करीब थी कि रेफर के कुछ ही समय बाद हाईवे पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा, तो रेफर करने से पहले उसकी स्थिति का आकलन किस स्तर पर किया गया?
- क्या उसे रात करीब एक बजे रेफर करना ही एकमात्र विकल्प था?
- यह सवाल अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहा है।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि प्रसूता को एक दिन पहले ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उसे असहनीय प्रसव पीड़ा की शिकायत थी। ऐसे में देर रात रेफरल का निर्णय मानवीय और चिकित्सकीय दोनों दृष्टि से जांच का विषय बनता है।
खासकर तब, जब यह उसकी पांचवीं डिलीवरी बताई जा रही है और पूर्व में नसबंदी का ऑपरेशन भी हो चुका है। इस पूरे घटनाक्रम में एम्बुलेंस कर्मियों की भूमिका जरूर राहत देने वाली रही। हाईवे पर चलते वाहन में प्रसव की स्थिति बनने के बावजूद ईएमटी पुष्पराज यादव और पायलट शिवम यादव ने तत्परता दिखाई और प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को देर रात करकेली अस्पताल पहुंचाया।
लेकिन एम्बुलेंस कर्मियों की तत्परता जिला अस्पताल की व्यवस्था पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह खत्म नहीं करती। जिला अस्पताल में महिला चिकित्सक के रूप में डॉक्टर रश्मि धनंजय पदस्थ हैं,जबकि एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की कमी बताई जा रही है।
पूर्व में सेवाएं दे चुके डॉक्टर प्रमोद द्विवेदी और डॉक्टर सरफराज के स्थानांतरण के बाद विशेषज्ञ सेवाओं की यह कमी प्रसूता एवं अन्य गंभीर मरीजों के उपचार में कितनी बड़ी चुनौती है,यह भी सामने आना जरूरी है।
एक तरफ अस्पताल में प्रसव पीड़ा से जूझती महिला,दूसरी तरफ आधी रात शहडोल का रेफरल और फिर अस्पताल से निकलने के कुछ ही देर बाद एम्बुलेंस में जन्म लेता नवजात,यह पूरा घटनाक्रम स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने कई सवाल छोड़ गया है।