
Vidisha News विदिशा। जिले में सड़कों के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन घटिया निर्माण और निगरानी की कमी के कारण कुछ ही महीनों में सड़कें बदहाल हो रही है। इसी का उदाहरण विदिशा से अहमदपुर तक की सड़क है, जिस पर दो माह पहले चार करोड़ रुपये रखरखाव पर खर्च किए थे। वर्तमान में यह पूरी सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है।
विदिशा से रायसेन जिले को जोड़ने वाली इस सड़क पर सौ से अधिक गांव आते है। इससे हर रोज हजारों ग्रामीणों का निकलना होता है लेकिन सड़क खराब होने की वजह से लोगों को रोज परेशान होना पड़ता है। बारिश के सीजन में यह मुश्किलें और बढ़ जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान गड्ढों ने वर्षा का पानी भर जाता है, वाहन चलाते समय पानी के कारण गड्ढे दिखाई नहीं देते और नजर चूकते ही वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते है।
अहमदपुर निवासी सत्येंद्र पवार बताते है कि विदिशा से अहमदपुर की दूरी 20 किमी की है। सड़क अच्छी हो तो 20 से 25 मिनट गांव पहुंचने में लगते है लेकिन अभी सड़क खराब होने के कारण गांव तक पहुंचने में एक घंटे से अधिक का समय लग जाता है। उनका कहना था कि ग्रामीण कई बार सड़क मरम्मत के लिए विभागीय अधिकारियों से आग्रह कर चुके है लेकिन सड़क की मरम्मत नहीं हो रही है।
यह सड़क मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन के अधीन आती है। दो माह पहले बारिश के पूर्व जून माह में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क का रखरखाव कार्य कराया गया था, लेकिन कुछ दिनों की बारिश में ही किया गया कार्य बह गया। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने घटिया कार्य किया था। सड़क के गड्ढों को ठीक करने के लिए न तो मजबूत बेस बिछाया और ना ही अच्छे से डामरीकरण किया। ठेकेदार के कर्मचारियों ने डामर की परत बिछाकर गड्ढों को छुपाने का कार्य किया। जिसके कारण दो – तीन बार की बारिश में ही सड़क पर फिर गड्ढे उभर गए। इस सड़क पर तीन से चार फीट के गड्ढे हो गए हैं ।
विदिशा से अहमदपुर होते हुए रायसेन जिले के गढ़ी तक यह सड़क वर्ष 2013 – 14 में बनी थी लेकिन गुणवत्ताहीन निर्माण के चलते यह सड़क दो साल भी नहीं चल पाई। सूत्रों के अनुसार बीते दस सालों में इस सड़क के रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके है, इसके बावजूद लोगों को चलने के लिए बेहतर सड़क नहीं मिल सकी।
जानकारों का कहना है कि डामर की सड़क की औसत उम्र करीब 15 साल होती है लेकिन घटिया निर्माण के चलते यह सड़क दस साल में ही बदहाल हो गई। ग्रामीण बताते है कि पिछले साल इसी सड़क की बदहाली के विरोध में कांग्रेस विधायक शशांक भार्गव ने आसपास के गांवों के लोगों के साथ चक्का जाम किया था। इसके बाद सड़क मरम्मत के लिए 95 लाख रुपये मंजूर हुए थे। यह राशि भी सड़क की बदहाली दूर करने में खर्च हो गई लेकिन सड़कों के गड्ढे दूर नहीं हुए।
एमपीआरडीसी के महाप्रबंधक डीके स्वर्णकार का कहना है विदिशा–अहमदपुर मार्ग से रेत से भरे डंपर बड़ी संख्या में निकलते है। सड़क पर क्षमता से अधिक भारी वाहन निकलने के कारण सड़क बार–बार खराब हो रही है। दो माह पहले ही रखरखाव के बाद सड़क खराब होने पर उनका कहना था कि रखरखाव करने वाले ठेकेदार को ही खराब सड़क की मरम्मत भी करना है। यह सड़क काफी खराब हो गई है। नए निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। एक वर्ष के भीतर नई सड़क की मंजूरी मिलने की उम्मीद है।